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सनातन का अपमान और धार्मिक आस्था पर आघात बर्दाश्त नहीं : डॉ. विजय कुमार सिंह "श्याम नाथ सिंह"

सनातन का अपमान और धार्मिक आस्था पर आघात बर्दाश्त नहीं : डॉ. विजय कुमार सिंह "श्याम नाथ सिंह"

  • भगवान राम के प्रति कथित आपत्तिजनक आचरण पर संत समाज से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील
पटना। अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के राष्ट्रीय महासचिव एवं खुसरूपुर स्थित श्री गौरी शंकर बैकुंठ नाथ धाम मंदिर न्यास समिति के कोषाध्यक्ष तथा पीठाधीश्वर डॉ. विजय कुमार सिंह एलिस श्याम नाथ सिंह ने सांसद पप्पू यादव पर भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संसद के मकर द्वार पर भगवान राम की तस्वीर के साथ जिस प्रकार का कथित आचरण किया गया, वह करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है और इसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

डॉ. श्याम नाथ सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल हिंदू समाज के आराध्य ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग, सत्य और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। ऐसे में भगवान राम की तस्वीर को किसी नेता के जूते के पास रखना अथवा उनके प्रति किसी भी प्रकार का कथित अपमानजनक व्यवहार करना देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने वाला विषय है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों को सभी धर्मों और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए तथा किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे समाज में धार्मिक भावनाएं आहत हों।

उन्होंने देशभर के साधु-संतों और धार्मिक संगठनों से अपील की कि वे इस मामले में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें तथा धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं के सम्मान के लिए समाज को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व है कि वह धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए समाज का मार्गदर्शन करे।

राष्ट्रीय महासचिव डॉ. श्याम नाथ सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय जनमानस की आस्था के केंद्र हैं। श्रीराम के आदर्शों ने सदियों से समाज को सत्य, न्याय, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का संदेश दिया है। इसलिए भगवान राम का अपमान किसी एक व्यक्ति या समुदाय की भावना का विषय नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर धार्मिक प्रतीकों और आराध्य देवताओं के प्रति अपमानजनक आचरण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत एक बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश है, जहां सभी धर्मों और संप्रदायों की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी धर्म के आराध्य या धार्मिक प्रतीक के प्रति अपमानजनक टिप्पणी अथवा व्यवहार सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके सार्वजनिक व्यवहार का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

डॉ. श्याम नाथ सिंह ने अपने बयान में पप्पू यादव की राजनीतिक विचारधारा और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी कई टिप्पणियां कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू यादव हिंदू धार्मिक परंपराओं और देवी-देवताओं के प्रति आस्था नहीं रखते। हालांकि, इन आरोपों पर पप्पू यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आने पर ही उनका पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की आस्था को चोट पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य का समाज को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना चाहिए। उन्होंने संत समाज, धार्मिक संगठनों और सनातन धर्मावलंबियों से अपील करते हुए कहा कि वे संयम और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधि से दूर रहें।

डॉ. श्याम नाथ सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनके जीवन से समाज को सदैव सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली राजनीति से देश का सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करें और सार्वजनिक जीवन में ऐसी भाषा एवं आचरण से बचें, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत हों।अंत में उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा सदैव सहिष्णुता, शांति और समरसता का संदेश देती रही है। इसलिए धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने संत समाज और आम नागरिकों से अपील की कि वे सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हुए सनातन मूल्यों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।

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