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गुरु पूर्णिमा पर गोवर्धन मठ पुरी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जगद्गुरु शंकराचार्य के पूजन-अर्चन के साथ सनातन वैदिक परंपरा के संरक्षण का संकल्प

गुरु पूर्णिमा पर गोवर्धन मठ पुरी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जगद्गुरु शंकराचार्य के पूजन-अर्चन के साथ सनातन वैदिक परंपरा के संरक्षण का संकल्प

पुरी। जय जगन्नाथ जी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी स्थित गोवर्धन मठ में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर पूज्यपाद स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर गोवर्धन मठ में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उड़ीसा के प्रमुख विद्वान पंडितों द्वारा गुरु पूजन एवं अर्चन किया गया। गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के निज सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती जी महाराज ने विधि-विधान के साथ गुरु पूजन संपन्न कराया। वहीं भक्तों की ओर से हरे कृष्ण शर्मा जी ने पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का पूजन कर श्रद्धा निवेदित की।

कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। संस्कृत के विश्वविख्यात श्लोक गायिका माधवी मधुकर झा एवं प्रेमानंद जी ने सुमधुर गुरु वंदना, स्तुति एवं भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों एवं गुरु वंदना से श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूब गए।
इस अवसर पर गोवर्धन गुरुकुल के छात्रों ने योग की विभिन्न विधाओं का मनमोहक प्रदर्शन किया। छात्रों की योग प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति में निहित योग परंपरा एवं शारीरिक-मानसिक संतुलन के महत्व को रेखांकित किया। वहीं आदित्य वाहिनी के भीमसेन जोशी एवं नारायण पांडा की टीम ने विभिन्न प्रकार के भाव नृत्य एवं भक्ति प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान के भजनों की मनोहारी प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया।
गुरु पूर्णिमा समारोह में पुरी के प्रमुख अतिथि एवं जगन्नाथ मंदिर से जुड़े परंपरागत धार्मिक दायित्वों के प्रतीक पुरी के राजा गजपति दिव्य सिंह देव जी ने भी सहभागिता की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ मंदिर की गौरवशाली परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और वर्तमान समय में सामने आ रही चुनौतियों की ओर उपस्थित श्रद्धालुओं का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने जगन्नाथ संस्कृति और उससे जुड़ी परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
क्रिया योग संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष परमहंस प्रज्ञानंद जी महाराज ने भी प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान विभिन्न संतों, विद्वानों एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोवर्धन पीठ, पुरी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज का दर्शन एवं पूजन कर आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
अपने गुरु पूर्णिमा संदेश में पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी ने श्रद्धालुओं को सनातन वैदिक परंपराओं के निर्वहन, संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल सांसारिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। मनुष्य को अपने इस अनमोल जीवन को सार्थक बनाने के लिए सदैव सत्कर्म, धर्म, साधना और लोककल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने सनातन वैदिक संस्कृति के मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने तथा आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को पहुंचाने का आह्वान किया। गुरु के प्रति श्रद्धा, धर्म के प्रति निष्ठा और समाज के प्रति सेवा भाव को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी गई।
समारोह में श्री प्रफुल्ल चैतन्य ब्रह्मचारी, ऋषिकेश ब्रह्मचारी, निगमानंद आश्रम के शंकरानंद जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य एवं विश्व ब्राह्मण भूषण सम्मान से सम्मानित प्रेमचंद झा, आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सीमा तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री निभा प्रकाश, आलोक प्रकाश, मातृ प्रसाद मिश्र, पीयूष झा, बबलू ठाकुर, सीतांशु चौधरी, पृथ्वीराज नाथ, मूलचंद राठी, राजकुमार मुंद्रा, धनेश राणधेर, गोकर्ण सौरवाल, अशोक कंदोई, डॉ. जे.के. सिंह, जटाशंकर झा, पवन जी सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर राष्ट्र एवं सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक जयघोष किया। सभागार में "हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, हम भारत भव्य बनाएंगे" तथा "हिंदू सर से मानसरोवर तक भारत वृहत बनाएंगे" जैसे उद्घोषों से वातावरण गूंज उठा। राष्ट्रभक्ति एवं धार्मिक उत्साह से ओतप्रोत इस आयोजन ने श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।गुरु पूर्णिमा के इस भव्य आयोजन ने गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन वैदिक संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक चेतना के प्रति श्रद्धा को और मजबूत किया। कार्यक्रम का समापन श्रद्धालुओं के सामूहिक "हर हर महादेव" के जयघोष के साथ हुआ।
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