"बरखा का प्रेम-संदेश"
पंकज शर्मातप्त धरा की देहरी ऊपर,
आई बरखा की नव चेतना।
मिट्टी की सौंधी खुशबू ने,
हवाओं में घोली वेदना।
पत्ता-पत्ता झूम उठा है,
शाखें लचकती अमराई में।
हरी चुनरिया ओढ़ प्रकृति,
मुस्काती अपनी तरुणाई में।
दामिनी के नर्तन से अम्बर,
एक सजीला रूप दिखाता।
प्रियतम की बाहों में सिमटकर,
मन का मयूर हर्षित हो जाता।
चूड़ी-बिंदिया और हरी चुनर,
सावन का अनुपम रंग सजाती।
भीगी हवा की हर इक सरगम,
हृदय में प्रीति का दीप जलाती।
निस्वार्थ भाव से बरसती बूंदें,
परमेश्वर की करुणा दर्शातीं।
घटाएं बनकर शिव का संकल्प,
धरा की सदियों की प्यास बुझातीं।
कण-कण में है उस असीम का वास,
प्रकृति का पावन उत्सव यही सिखाता।
त्याग और नेह की यह अविरल धारा,
आत्मा को उस परमात्मा से मिलाता।
. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️ "कमल की कलम से"✍️
(शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews