Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

आरटीआई एक्टिविस्ट को जान से मारने की धमकी, सुरक्षा की मांग को लेकर राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार

आरटीआई एक्टिविस्ट को जान से मारने की धमकी, सुरक्षा की मांग को लेकर राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार

गोपालगंज, बिहार। समाजसेवी, पत्रकार एवं सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुरेश चंद पाण्डेय उर्फ त्यागी को कथित रूप से अपराधी तत्वों द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला अब राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। पीड़ित ने अपनी सुरक्षा एवं न्याय की मांग को लेकर राज्यपाल, राष्ट्रपति, मानवाधिकार आयोग तथा न्यायपालिका के विभिन्न उच्च संस्थानों से हस्तक्षेप की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, सुरेश चंद पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि 12 अप्रैल 2026 को सुदर्शन उर्फ सुदर्शना से जुड़े लोगों द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से जान से मारने की धमकी दी गई। इस संबंध में उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को स्थानीय पुलिस प्रशासन को लिखित सूचना देकर सुरक्षा की मांग की थी।

पीड़ित ने बताया कि उन्होंने 30 जून 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से बिहार के राज्यपाल के नाम एक विस्तृत आवेदन, साक्ष्यों सहित, जिला पदाधिकारी गोपालगंज के माध्यम से प्रेषित किया है। आवेदन में सुरक्षा प्रदान करने तथा निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही आवेदन की प्रतिलिपि जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपालगंज, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, बिहार मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति भवन को भी भेजी गई है।

आरटीआई आवेदन के बाद बढ़ा विवाद


बताया जाता है कि सुरेश चंद पाण्डेय ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत ग्राम पंचायत राज पगरा से संबंधित विभिन्न मामलों में सूचना मांगी थी। इनमें पंचायत की आय-व्यय संबंधी जानकारी, योगिन्दा देवी के नाम से जारी जन वितरण प्रणाली विक्रेता अनुज्ञप्ति तथा पंचायत शिक्षक नियोजन से जुड़े मामलों की सूचनाएं शामिल थीं।

पाण्डेय का आरोप है कि इन्हीं सूचनाओं की मांग के कारण उनके खिलाफ विरोध और दबाव का माहौल बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि 15 जनवरी 2026 को उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया, जिसके संबंध में विजयपुर थाना कांड संख्या 23/26, दिनांक 18 जनवरी 2026 दर्ज किया गया। मामले में सुदर्शन, सुनील, शैलेश तथा कुंदन सहित कई लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

पीड़ित का यह भी कहना है कि संभावित हमले की आशंका को लेकर उन्होंने वर्ष 2020 में ही स्थानीय पुलिस को लिखित सूचना दी थी। उनका आरोप है कि यदि पुलिस प्रशासन ने उस समय मामले को गंभीरता से लिया होता तो बाद की घटनाओं को रोका जा सकता था।

फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप


सुरेश चंद पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि हमलावर पक्ष की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उनके विरुद्ध भी विजयपुर थाना कांड संख्या 24/26 दर्ज कर दिया, जिसे वे "जवाबी एवं फर्जी मुकदमा" बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद आरटीआई कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने तथा झूठे मुकदमों में फंसाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

सरकार के निर्देशों के बावजूद सुरक्षा नहीं


पाण्डेय ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के संबंध में पूर्व में शासनादेश जारी किया गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 2026 में भी विभागीय स्तर पर उनके मामले में सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु निर्देश जारी किए गए।

बताया गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद गोपालगंज समाहरणालय ने भी पुलिस अधीक्षक को पत्र जारी कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की अनुशंसा की थी। बावजूद इसके, पाण्डेय का कहना है कि उन्हें अब तक अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल सकी है।
समाज सेवा और आरटीआई क्षेत्र में मिला सम्मान

सुरेश चंद पाण्डेय लंबे समय से सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें नई दिल्ली स्थित एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन द्वारा "मैन ऑफ अचीवमेंट अवार्ड-1999" से सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त सूचना के अधिकार आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए उन्हें दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन, पटना द्वारा "दिव्य रश्मि सम्मान" से भी सम्मानित किया गया है।

विभिन्न संगठनों ने उठाई सुरक्षा की मांग


मामले को लेकर बिहार के विभिन्न आरटीआई एवं नागरिक अधिकार संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है। उत्तर बिहार आरटीआई एक्टिविस्ट संगठन, बिहार आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन, बिहार अभिभावक संघ, बिहार नागरिक अधिकार मंच तथा बिहार राज्य सूचना का अधिकार कार्यकर्ता संघ सहित कई संगठनों के पदाधिकारियों ने सुरेश चंद पाण्डेय को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

संगठनों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में आरटीआई कार्यकर्ता के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक एवं सरकारी अधिकारियों की होगी।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें


आरटीआई कार्यकर्ता को मिली कथित धमकियों, सुरक्षा संबंधी मांगों तथा विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंची शिकायतों के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुरक्षा एवं न्याय की मांग को लेकर उठे इस मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं और आरटीआई कार्यकर्ता को कब तक प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ