फुटाब के आह्वान पर जीबीएम कॉलेज के शिक्षक संघ ने किया विरोध प्रदर्शन

- वेतन तथा पेंशन के नियमित भुगतान के लिए लगाई गुहार
- महिला महाविद्यालयों पर मंडराते वित्तीय संकट को भी दूर करने की मांग रखी गई
गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के शिक्षक संघ ने राज्यस्तरीय शिक्षक संघ ‘फुटाब’ के आह्वान पर कॉलेज के प्रशासनिक भवन के समक्ष अपराह्न 12.00 बजे से 1.00 बजे तक एकत्रित होकर एवं बायें हाथ पर काला बिल्ला लगाकर सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शित किया। कॉलेज के शिक्षक संघ ने सरकार एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा शिक्षकों की सैलेरी तथा पेंशन तीन-चार महीनों तक रोके रहने पर बेहद दुख जताया। शिक्षकों ने वेतन एवं पेंशन के ससमय भुगतान के लिए, शिक्षकों के एन.पी.एस. अंशदान के नियमित रूप से जमा करवाये जाने के लिए, प्रोन्नति के लंबित मामलों के शीघ्रातिशीघ्र निपटारे के लिए, शिक्षकों के लंबित एरियर के अविलंब जारी करने के लिए कॉलेज प्रशासन एवं सरकार से गुहार लगाई। महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी तथा अध्ययन-अध्यापन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर एवं अन्य अनिवार्य सुविधाओं की माँगों की पूर्ति के लिए अपनी आवाज़ उठाई।
जीबीएम कॉलेज के शिक्षक संघ की अध्यक्ष डॉ अनामिका कुमारी ने कहा कि शिक्षकों की सैलेरी एवं पेंशन का नियमित रूप से भुगतान नहीं किया जाना बहुत बड़ा अत्याचार है। संघ की उपाध्यक्ष श्रीमती बनीता कुमारी ने शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों की तीन-चार महीनों तक सैलेरी एवं सेवानिवृत्त कर्मियों का पेंशन नहीं दिये जाने को अत्यंत अपमानजनक, अमानवीय एवं क्रूर व्यवहार बतलाते हुए इस समस्या के शीघ्रातिशीघ्र निराकरण करने की मांग रखी। संघ की सचिव डॉ नगमा शादाब ने कहा कि शिक्षकों के लिए प्रतिदिन नये-नये नोटिसेज जारी किये जाते हैं, लेकिन शिक्षकों की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं जाता। महिला शिक्षकों को दी जाने वाली छुट्टियों पर भी गाज गिरती रहती है। शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाओं एवं अधिकारों के संबंध में सदैव अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती है। शिक्षक संघ की सह सचिव डॉ अमृता कुमारी घोष ने महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी पर चिंता जताई तथा छात्राओं के हित में इस समस्या के शीघ्र निराकरण की माँग उठाई। कोषाध्यक्ष डॉ रुखसाना परवीन ने शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के लंबित एरियर का भुगतान नहीं किये जाने पर गंभीर नाराज़गी जताई।
समर्थ पोर्टल की समन्वयक डॉ शुचि सिन्हा ने कहा कि महिला महाविद्यालयों में तो टीचर्स की स्थिति और भी खराब है। यहाँ हमेशा फंड की कमी बनी रहती है, क्लासरूम्स की कमी है, जिसके कारण कभी-कभी एक रूम में ही दो-दो कक्षाओं की छात्राओं को पढ़ाना पड़ता है, टीचर्स के लिए विभाग नहीं हैं। डॉ शुचि ने इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त किए जाने की मांग रखी। प्रो. अफ्शां सुरैया ने कॉलेज में लैब सुविधाओं की कमी पर भी काफी चिंता जताई। डॉ प्रियंका कुमारी ने भी विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण हो रही परेशानियों पर नाराजगी व्यक्त की। महाविद्यालय की नव नियुक्त शिक्षिका डॉ अफ्शां नाहिद, डॉ प्रमिला कुमारी, डॉ शबाना परवीन एवं डॉ सुनीता कुमारी, डॉ सपना पांडे, डॉ दीपिका, डॉ प्रियंका पांडेय आदि ने कहा कि नियुक्ति पत्र में एक वर्ष तक प्रोबेशन पीरियड मेंशन होने के बावजूद भी अभी तक कन्फर्मेशन लेटर नहीं मिल सका है। अभी भी उनकी सात महीने की सैलेरी नहीं मिली है। डॉ सीमा कुमारी, डॉ किरण कुमारी, डॉ अमृता कुमारी, डॉ रानी कुमारी, डॉ वीणा कुमारी, डॉ गणेश प्रसाद सहित अन्य अतिथि शिक्षकों ने बतलाया कि उनकी सैलेरी भी जनवरी माह से अबतक नहीं आई है, जिसके कारण उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सेवा के रिन्यूअल संबंधी सूचना भी प्राप्त नहीं हुई है।
कॉलेज की जन संपर्क अधिकारी डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि शिक्षकों में इस बात के लिए काफी नाराजगी है कि समय से सभी कक्षाएँ लेने तथा हर कार्य अनुशासन के साथ एवं सरकार से प्राप्त दिशानिर्देशों के अनुसार करने के उपरांत भी शिक्षकों को ही हर समस्या के लिए दोषी ठहरा दिया जाता है। शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मियों के लिए तो बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू कर दी गई है, लेकिन स्टूडेंट्स के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू नहीं की गई है। स्टूडेंट्स के अटेंडेंस को सही करने के लिए किये गये तमाम प्रयत्नों के उपरांत यदि स्टूडेंट्स क्लास नहीं करने आएँ, तो उसके लिए भी टीचर्स को ही अपराधी ठहरा दिया जाता है। स्टूडेंट्स की उपस्थिति बढ़ाने के लिए किए जाने वाले सभी प्रयत्नों के बावजूद कुछ ही स्टूडेंट्स पढ़ने आयें, तो शिक्षकों को दोषी ठहराना कहाँ तक सही है? शिक्षकों के मध्य इस मसले पर चर्चा होती रही कि महिला कॉलेजों की आर्थिक दुर्गति के लिए शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी कहाँ तक और किस तरह से ज़िम्मेदार हैं?
छात्राओं की 75℅ उपस्थिति को लेकर भी शिक्षक वर्ग एवं छात्र-छात्राओं के बीच सदैव विरोध की स्थिति बनी रहती है। शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा छात्र-छात्राओं के हितार्थ कार्य करते रहने के बावजूद भी शिक्षकों के साथ अपमानजनक व्यवहार किए जाते हैं। महिला महाविद्यालयों में एनएसएस इकाई, एनसीसी इकाई, खेलकूद विभाग, सांस्कृतिक विभागों में वित्तीय संकट बना रहता है। शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों के आयोजन संबंधी निर्देश दे तो दिए जाते हैं, लेकिन आयोजन के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं करायी जाती है। ऐसी स्थिति में छात्राओं और शिक्षकों के मध्य ही नहीं, अपितु प्रधानाचार्य एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं के बीच भी मनमुटाव की स्थिति भी बनी रहती है। महिला महाविद्यालयों पर मंडराते वित्तीय संकट को भी दूर करने की मांग रखी गई। महिला महाविद्यालयों में छात्राओं के हितार्थ पीजी कक्षाओं के संचालन को भी अनिवार्य रूप से प्रारंभ करवाया जाना चाहिए। शिक्षक संघ ने आज के विरोध प्रदर्शन के संबंध में प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल को एक ज्ञापन भी सौंपा। इस अवसर पर उपस्थित डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ प्यारे माँझी, डॉ जया चौधरी, डॉ आशुतोष पांडेय, डॉ पूजा, डॉ पूजा राय, डॉ कृति सिंह आनंद, डॉ फातिमा, डॉ नुद्रतुन निसां, डॉ विजेता लाल, डॉ वीणा कुमारी जायसवाल, डॉ सुरबाला कृष्णा, प्रीति शेखर, डॉ सीता, सुनील कुमार, आनंद कुमार, विक्रम कुमार ने भी वेतन एवं पेंशन संबंधी अनियमितताओं पर गहरा रोष व्यक्त किया और आशा जताई कि इन समस्याओं पर सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाएँगे।
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