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बादलों से निहोरा

बादलों से निहोरा

जय प्रकाश कुवंर
आजा कजरा बादल आजा।
धरती का तू प्यास बुझाजा।।
बहुत निहोरा लगा रहे हैं,
फिर भी जो न तू आएगा।
अपनी मर्जी से फिर आकर,
रास्ता घाट डूबाएगा।।
गलियों में नावें तैरेंगी,
लोग न बाहर आयेंगे।
इंद्र देव को सब जन मिलकर,
भला बुरा सुनायेंगे।।
अभी तपिश से सब दुख पाते, तब
जल भरे रास्ते में चल नहीं पायेंगे।
कोई न दुखड़ा सुनने वाला,
लोग रोकर व्यथा किसे सुनायेंगे।।
हे जल के देवता सुन लो निहोरा,
बरसो बजा कर गर्जना बाजा।
आजा कजरा बादल आजा,
धरती का तू प्यास बुझाजा।।

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