बादलों से निहोरा
जय प्रकाश कुवंरआजा कजरा बादल आजा।
धरती का तू प्यास बुझाजा।।
बहुत निहोरा लगा रहे हैं,
फिर भी जो न तू आएगा।
अपनी मर्जी से फिर आकर,
रास्ता घाट डूबाएगा।।
गलियों में नावें तैरेंगी,
लोग न बाहर आयेंगे।
इंद्र देव को सब जन मिलकर,
भला बुरा सुनायेंगे।।
अभी तपिश से सब दुख पाते, तब
जल भरे रास्ते में चल नहीं पायेंगे।
कोई न दुखड़ा सुनने वाला,
लोग रोकर व्यथा किसे सुनायेंगे।।
हे जल के देवता सुन लो निहोरा,
बरसो बजा कर गर्जना बाजा।
आजा कजरा बादल आजा,
धरती का तू प्यास बुझाजा।।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews