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मेरा तेरा में क्या है

मेरा तेरा में क्या है

मेरा तेरा कर-कर के
निकल गई ता उम्र।
कुछ भी तो मिला नही
देखो अब तक हमें ।।


काल कल्पनाओं का देखों
कैसा दौर अब आ गया।
जीत हार का अंतर भी
एक सेकेंड ने गमा दिया।।


गति नियंत्रण करना भी
हम को आना चाहिए।
कब तेज और कब धीमा
हमें जीवन में दौड़ना है।।


एकल विचार धाराओं का
अब अंत सा हो रहा है।
इसीलिए फिर से हमें
मिल जुलकर रहना है।।


सीमित रहने से हमनें
कितना कुछ गमा दिया।
न बच्चों को दादा-दादी का
स्नेह प्यार भर-पूर मिला।।


छोड़ों पैसे की हवस को
जिससे रिश्तें बिगड़तें है।
बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से
क्या सच में पैसा बड़ा है।।


जीवन की सबसे बड़ी
एक बात समझ लो।
भाई-बहिन माँ-बाप से
बढ़कर जग में कोई नही।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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