तुम जीवन का मधुमास, प्रिय
कुमार महेंद्र
गर्वित है हर पल मेरा,
हर भाव हुआ पुलकित है।
तुम्हारे संग जीवन का,
हर स्वप्न सदा आलोकित है।
राम-सा मैं बन जाऊँ,
तुम सीता-सी खास, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
तुम्हारे बढ़ते कदमों से,
हर ओर नया उजियारा है।
मेरे जीवन के हर सुख का,
बस तुम ही एक सहारा है।
तुम पार्वती-सी पावन हो,
मैं शिव-सा विश्वास, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
अंधियारों का अंत कर,
तुम प्रेम-दीप जलाती हो।
करुणा का सागर बनकर,
बाहों में मुझे समाती हो।
तुम राधा-सी मधुर प्रीति,
मैं कृष्ण-सा रास-विलास, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
तुमसे ही जीवन महके,
तुमसे हर मधुर राग।
तुम्हारी दिव्य आभा में,
झंकृत होते अनुराग।
तुम रोहिणी-सी शोभित हो,
मैं चंद्र-सा उजास, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
प्रणय की इस पावन बेला में,
बस इतना ही कहना है।
तुम मुझमें हर पल बसती हो,
मुझे भी तुममें रहना है।
जन्म-जन्म के इस बंधन का,
नित करूँ मैं अरदास, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
तुम जीवन की मधुर सरिता,
मैं तेरा निर्मल तीर।
तुम बिन सूना हर उत्सव,
मेरा रहता मन अधीर।
हर जन्म तुम्हारा साथ मिले,
यही हृदय की आस, प्रिय।
तुम जीवन का मधुमास, प्रिय।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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