नन्हे बच्चे
संगीता सागरहम नन्हे भारत के बच्चे,
मन के होते बड़े ही सच्चे।हँसते-गाते आगे बढ़ते,
नही कभी किसी से डरते।
सुबह-सुबह जब सूरज आता
रात का अंधेरा दूर भगाता
घर आंगन में उजियारा फैलाता
नन्हे मन में नई उमंगें जगाता ।
माँ प्यार से हमें जगाती,
जल्दी उठने के फायदे गिनाती
वीर महापुरुषों की कहानी सुनाती
,नेक राह पर चलना सिखाती।
पापा मेहनत करके आते,
न ए खिलौने और मिठाई लाते
हम सब मिल बांटकर खाते
मम्मी पापा संग खुशियां मनाते।
विद्यालय हम रोज़ हैं जाते नई-नई बातें सीख के आते
दोस्तों के संग खूब उधम मचाते
कभी कभी शिक्षक से डांट भी खाते।
शिक्षक ज्ञान का दीप जलाते
अंधियारा मन से मिटाते।किताबों से दोस्ती कराते,
जीवन का महत्व समझाते।
पढ़-लिखकर है हमें आगे बढ़ना
देश का नाम है उज्जवल करना
हम बच्चे हैं भारत की शान ।
हमसे है रौशन हिन्दुस्तान।
संगीता सागर
मुजफ्फरपुर, बिहार
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