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श्रीति एवं संदीप राशिनकर पुणे में सम्मानित, साहित्य और कला साधना को मिला राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

श्रीति एवं संदीप राशिनकर पुणे में सम्मानित, साहित्य और कला साधना को मिला राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

इंदौर/पुणे। इंदौर के प्रतिष्ठित चित्रकार, साहित्यकार एवं कला-संस्कृति के संवाहक संदीप राशिनकर तथा श्रीति राशिनकर को उनकी दीर्घकालीन साहित्य एवं कला साधना तथा समाज में रचनात्मक चेतना के प्रसार में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए पुणे में सम्मानित किया गया।

यह सम्मान महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान क्षेत्र के लोकप्रिय एवं कर्मठ जनप्रतिनिधि रामभाऊ वाकड़कर द्वारा प्रदान किया गया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

सम्मान प्रदान करते हुए रामभाऊ वाकड़कर ने कहा कि कला और साहित्य समाज को नई दिशा देने का प्रभावी माध्यम हैं। संदीप राशिनकर एवं श्रीति राशिनकर ने अपनी सृजनशीलता, चित्रकला, लेखन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और रचनात्मकता का वातावरण निर्मित करने का सराहनीय कार्य किया है। उनका योगदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

संदीप राशिनकर लंबे समय से चित्रकला, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों तथा मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करते रहे हैं। वहीं श्रीति राशिनकर भी साहित्य, कला एवं सामाजिक चेतना से जुड़े विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। दोनों की संयुक्त साहित्यिक एवं कलात्मक यात्रा ने अनेक युवाओं और कला प्रेमियों को नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान की है।

सम्मान प्राप्त करने के पश्चात संदीप राशिनकर एवं श्रीति राशिनकर ने आयोजकों तथा सम्मान प्रदान करने वाले सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि कला और साहित्य के क्षेत्र में निरंतर समर्पण के साथ कार्य करने की नई प्रेरणा है। उन्होंने भविष्य में भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन, सांस्कृतिक संरक्षण तथा रचनात्मक मूल्यों के संवर्धन के लिए अपनी साधना निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

समारोह में उपस्थित साहित्यकारों एवं कलाकारों ने भी राशिनकर दंपति को बधाई देते हुए उनके सम्मान को कला एवं साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर सृजनशील योगदान की कामना की।प्रस्तुति : दुर्गेश मोहन
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