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दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के संयुक्त तत्वावधान में साइबर सुरक्षा एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : डॉ. राकेश दत्त मिश्र

पटना। डिजिटल युग में तकनीक जहां आम लोगों के जीवन को सरल और सुविधाजनक बना रही है, वहीं साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने समाज के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। मोबाइल फोन, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया एवं विभिन्न डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), पटना के सहयोग से 24 जुलाई 2026 को "साइबर सुरक्षा एवं विधिक जागरूकता शिविर" का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन सुश्री ज्योति चंदन, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना एवं श्री अशोक कुमार सिंह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं पैनल अधिवक्ता, तथा पारा विधिक स्वयं सेवकों के सानिध्य में किया गया। शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों को साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, उनसे बचाव के उपायों तथा नागरिकों के कानूनी अधिकारों और उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के निदेशक डॉ. राकेश दत्त मिश्र द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया और डिजिटल सेवाएं हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। इसके साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। साइबर ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, यूपीआई धोखाधड़ी, फर्जी केवाईसी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, पहचान की चोरी और ऑनलाइन ब्लैकमेल जैसी घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता प्रत्येक नागरिक के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. मिश्र ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइबर अपराध से बचाव के महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, पासवर्ड और बैंक से संबंधित किसी भी गोपनीय जानकारी को किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक, पुलिस, न्यायालय या कोई भी सरकारी संस्था फोन पर कभी भी किसी व्यक्ति से ओटीपी या एटीएम पिन नहीं मांगती।
उन्होंने कहा कि अनजान लिंक, संदिग्ध क्यूआर कोड या एपीके फाइल पर बिना जांच के क्लिक नहीं करना चाहिए और अज्ञात स्रोतों से किसी भी प्रकार का ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से यूपीआई से संबंधित धोखाधड़ी के प्रति सावधान करते हुए कहा कि यूपीआई पिन केवल पैसे भेजने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। यदि कोई व्यक्ति पैसे प्राप्त करने के नाम पर यूपीआई पिन डालने को कहता है तो यह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
डॉ. मिश्र ने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी जानकारी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और संवेदनशील तस्वीरें साझा करने से बचना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए तथा अपने महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को सक्रिय रखना चाहिए।
उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अपने बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को सूचना देने के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की स्थिति में शिकायत करने में जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, उतना ही धन की रिकवरी और अपराध की जांच में सहायता मिल सकती है।
विधिक अधिकारों की जानकारी भी आवश्यक
कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा के साथ-साथ विधिक जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक तथा कानून के अंतर्गत पात्र अन्य व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि कानून की जानकारी और समय पर सही कानूनी सलाह नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है। किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता का लाभ उठाना चाहिए।
इस अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि "सावधानी ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।" किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना चाहिए, तभी एक सुरक्षित डिजिटल समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. ऋचा दुबे, श्रीनिवास सिंह सहित अनेक अधिवक्ता, पारा विधिक स्वयंसेवक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर देवेंद्र पंडित, कन्हैया जी, संतोष कुमार, सपना रानी, कौशल किशोर, वैष्णवी कुमारी, अर्चना कुमारी, सीमा सिंह, मंजू कुमारी, प्रीती कुमारी, अर्जुन कुमार, कुंदन कुमार, धीरज कुमार, सत्येंद्र कुमार, कुमारी रश्मि, अंकुर कुमार सिन्हा, सुरेश कुमार, सतीश कुमार, ऋतुराज कुमार, मोनल कुमार सिंह, गणेश तिवारी, रूबी कुमारी, परवेज आलम, गुड़िया कुमारी, अजय कुमार मिश्र, पिंकी कुमारी, कीर्तिका साक्षी, एम.के. सिंह, ओंकार पाण्डेय, विनय कुमार तिवारी, क्षितिज राज, अमन राज, सचिन कुमार, ऋतिक कुमारी, मंटू कुमार, नुजहत परवीन, कशिश चौहान, रेखा प्रेम समैया, प्रियांश कुमार सिंह, सृष्टि राज, दीपक कुमार, प्रवीण कुमार, दौलत कुमार, हेमंत कुमार, कोमल कुमारी, नारायण प्रसाद सिंह, राज कुमार मिश्र, संजय शुक्ला, शिवानंद तिवारी, लक्ष्मण पाण्डेय, सन्नी कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में शिविर में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न (मोमेंटो) एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से प्रतिभागियों को साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने, अपने डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर समय पर कानूनी सहायता प्राप्त करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहेंगे तथा अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए जागरूक करेंगे। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था-"जागरूक बनें, सुरक्षित रहें और अपने अधिकारों को जानें।" एक जागरूक नागरिक ही सुरक्षित समाज और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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