लेखक आनंद हठिला
श्रीराम और बजरंगबली दोनों ही भगवान शिव के परम भक्त थे, इसीलिए वे शिवलिंग की पूजा करते थे। इसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण और मान्यताएँ हैं:
श्रीराम और शिवलिंग
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भगवान शिव का आशीर्वाद👉 श्रीराम, भगवान विष्णु के अवतार थे और भगवान शिव उनके आराध्य थे। जब वे लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे, तो उन्होंने समुद्र तट पर भगवान शिव की पूजा की। उन्होंने बालू से एक शिवलिंग का निर्माण किया, जिसे आज रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। श्रीराम ने यह पूजा लंकापति रावण को हराने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की थी, क्योंकि रावण भी शिवजी का परम भक्त था।
भक्ति और समर्पण: यह घटना दर्शाती है कि भगवान के अवतार भी अपने आराध्य के प्रति कितना सम्मान और समर्पण रखते थे।
बजरंगबली और शिवलिंग
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शिवजी के रुद्रावतार👉 बजरंगबली, स्वयं भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं। इस नाते, वे अपने ही मूल स्वरूप की पूजा करते थे।
रामभक्ति का प्रतीक: बजरंगबली भगवान श्रीराम के परम भक्त थे। चूंकि श्रीराम, भगवान शिव की पूजा करते थे, इसलिए बजरंगबली भी अपने आराध्य के आराध्य (भगवान शिव) की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करते थे। यह भक्ति और सेवा का एक अद्भुत उदाहरण है।
एक ही शक्ति: यह मान्यता भी है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव एक ही हैं। बजरंगबली का शिवलिंग की पूजा करना इस सत्य को प्रमाणित करता है कि सभी देवता एक ही परमात्मा के विभिन्न रूप हैं।
इस प्रकार, श्रीराम और बजरंगबली का शिवलिंग पूजन उनकी अगाध भक्ति, विनम्रता और धार्मिक श्रद्धा को दर्शाता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि भगवान एक हैं, भले ही हम उन्हें किसी भी रूप में पूजें।
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