नींद का आलम, तुम क्या जानो,
जाग कर देखो, सोओ तो जानो।खुशबू फैलाते फूल, जहां में कैसे,
इन्सान बनकर देखो, तो जानो।
उसके जनाजे के पीछे लाखों क्यूँ थे,
किसी का दर्द समझो, तो जानो।
सूनापन मेरी आँखों में क्यों है,
अपनो को बिसराकर देखो, तो जानो।
जो जिया खुद की खातिर जहां में,
तन्हाई का आलम, उससे जानो।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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