भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम, पटना, बिहार में दिए गए संबोधन के मुख्य बिंदु

- 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान से लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी द्वारा दिया गया ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान आपातकाल विरोधी आंदोलन की मजबूत नींव बना।
- 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र, संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का गला घोंटते हुए देश पर आपातकाल थोपा।
- राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को संविधान की दुहाई देने से पहले आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संविधान पर किए गए हमलों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
- इंडी गठबंधन और कांग्रेस की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की नहीं, बल्कि सत्ता प्राप्ति की राजनीति है, जिसकी सोच आज भी आपातकाल की मानसिकता से मुक्त नहीं हुई है।
- आपातकाल के दौरान 1 लाख 31 हजार से अधिक लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाला गया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर अभूतपूर्व हमला था।
- कांग्रेस सरकार ने जबरन नसबंदी अभियान चलाकर लगभग 1 करोड़ 10 लाख लोगों को प्रभावित किया, जो मानव गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार था।
- प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, सैकड़ों पत्रकारों को जेल भेजा गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया गया।
- 42वें संविधान संशोधन सहित कई कदम उठाकर न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करने तथा सत्ता को निरंकुश बनाने का प्रयास किया गया।
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज गुरुवार को पटना, बिहार में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित किया। श्री नड्डा ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र, संविधान, न्यायपालिका, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का गला घोंटते हुए देश पर आपातकाल थोपा था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार की धरती लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक संघर्ष की जन्मस्थली रही है और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के नेतृत्व में चले आंदोलन ने देश को तानाशाही के विरुद्ध संगठित करने का कार्य किया। इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री श्री नागेंद्रनाथ त्रिपाठी, केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह तथा पटना महानगर अध्यक्ष श्री रूपक नारायण मेहता सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि संविधान हत्या दिवस और लोकतंत्र की हत्या दिवस के अवसर पर मुझे पटना आने और आप सबके साथ शामिल होने का अवसर मिला है। वैसे तो देश भर में संविधान हत्या दिवस और लोकतंत्र की हत्या दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन पटना में इसे मनाने का एक विशेष मतलब है और इसका एक विशेष स्थान है। देश के कोने-कोने में भारतीय जनता पार्टी के आह्वान पर कार्यक्रम हो रहे हैं, लेकिन पटना का यह कार्यक्रम अपने आप में इसलिए विशेष है क्योंकि लोकतंत्र की हत्या और संविधान की हत्या के खिलाफ जो लड़ाई थी। उसका बीज यदि कहीं बोया गया था, तो वह बिहार के पटना में बोया गया था। मैं मन ही मन सोच रहा था कि इस ज्ञान भवन से कुछ कदम बाहर जाएँ, तो सामने गांधी मैदान दिखाई देता है। यह गांधी मैदान उस ऐतिहासिक घटना का साक्षी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आप सब लोग भी 5 जून 1974 को नहीं भूल सकते। मैं स्वयं भी 5 जून 1974 के उस आंदोलन में शामिल था। उस समय मैं मैट्रिक के विद्यार्थी हुआ करता था। मुझे याद है, जब जयप्रकाश नारायण जी ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था और यहाँ जितने भी लोग बैठे हैं, वे सब उस समय की गफूर सरकार को बर्खास्त करने के लिए राज्यपाल आर. डी. भंडारे को ज्ञापन देने गए थे। 5 जून 1974 और 18 मार्च 1974, ये दोनों दिन इस आंदोलन को चलाने के लिए नींव के पत्थर साबित हुए। लेकिन उन दिनों के साथ-साथ मुझे यह खुशी भी होती है कि मुझे भी इस लड़ाई में भाग लेने का अवसर मिला। इस बात पर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूं और गर्व का अनुभव करता हूं।
श्री नड्डा ने कहा कि 25 जून वह दिन था, जब प्रजातंत्र का गला घोंटा गया, प्रेस का गला घोंटा गया, व्यक्ति की आजादी पर पाबंदी लगाई गई और संविधान पर कुठाराघात किया गया। यह सब हमने अपनी आँखों के सामने देखा है। आज इसे इसलिए याद किया जाता है, ताकि भारत का प्रजातंत्र उसी मजबूती के साथ हमेशा कायम रहे, जिस मजबूती के साथ उसने उस समय प्रजातंत्र का गला घोंटने वालों को जवाब दिया था और इस पर कभी कोई आँच न आए। इसके लिए हम सभी प्रतिज्ञा भी करते हैं। यह आने वाली सरकारों और आने वाली जम्हूरियत के लिए भी एक उदाहरण है कि इस प्रकार का दुस्साहस करने वालों का हश्र क्या होता है और भारत की जनता किस प्रकार जागृत होकर जवाब देती है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जस्टिस जगमोहन ने इंदिरा गांधी को दोषी ठहराया था और कहा था कि उन्होंने चुनाव में धांधली की है तथा सरकार का दुरुपयोग किया है। इसी कारण उन्हें पद से हटाया गया और उनकी सदस्यता समाप्त की गई। यह बात हम सबको मालूम है। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि इस घटना के तीन सप्ताह के भीतर ही इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी थी। वह इमरजेंसी लगभग 21 महीने तक चली और वह सब भी हमने अपनी आँखों से देखा है। यदि इमरजेंसी की चर्चा की जाए, तो यह जानना जरूरी है कि 1 लाख 31 हजार लोगों को बिना कारण और बिना न्यायिक समीक्षा के जेल में डाल दिया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि अंग्रेजों के खिलाफ पूरे आंदोलन के दौरान भी अंग्रेजों ने कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जेल में नहीं डाला, जितना इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी ने डाल दिया। मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट, जिसे ब्रिटिश शासन ने बनाया था, उसका भी इतना व्यापक इस्तेमाल नहीं हुआ था, जितना इंदिरा गांधी ने किया।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स, डीआईआर, जिसे अंग्रेजों ने बनाया था, उसका इस्तेमाल उन्होंने पूरे आजादी के आंदोलन में भी उतना नहीं किया, जितना इंदिरा गांधी ने किया। इसी कारण हम कहते हैं कि लोगों को बार-बार यह याद दिलाना चाहिए कि आजादी ऐसे ही नहीं मिली है। मुझे वह दिन याद हैं और यहाँ बैठे सभी लोगों को भी वे दिन याद होंगे, जब कहीं पीछे कोई पुलिस वाला दिखाई देता था तो शरीर ऊपर से नीचे तक काँप जाता था और ऐसा लगता था कि वह हमें ही पकड़ने आया है। यह केवल मैंने नहीं, बल्कि लाखों और हजारों लोगों ने सहा है और बिहार में इसे देखा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नसबंदी के जरिए प्रजातंत्र का गला घोट दिया गया था। मैं मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के आंकड़ों के आधार पर भारत का स्वास्थ्य मंत्री बोल रहा है। इमरजेंसी के दौरान 1 करोड़ 10 लाख लोगों की नसबंदी हुई थी। जिसमें से लगभग 80 लाख के लोगों को यह 75 और 76 के दौरान हुआ। कैसी जिंदगी होगी? गांव की तरफ अगर कोई डॉक्टर आता था तो नौजवान भाग जाते थे गांव छोड़कर। जेल जाना तो अलग रहा लेकिन आपने मानवता पर इतना बड़ा आघात किया कि कांग्रेस ने जबरन 1 करोड़ 10 लाख लोगों का स्टेरलाइजेशन कर दिया। नसबंदी कर दी। यह संख्या उस समय अगर 1 करोड़ 10 लाख की संख्या जोड़ें तो यह उस समय के ग्रीस की पापुलेशन से ज्यादा है। दिल्ली में लगभग 1 लाख 500 मकान ढहाए गए और करीब 7 लाख लोग बेघर हो गए। यदि प्रेस की बात करें, तो 300 से अधिक पत्रकार जेल में थे। अखबार छपते थे, लेकिन उनमें कुछ नहीं होता था। वे लगभग खाली रहते थे। सेंसरशिप लागू थी और लोगों के मुँह पर ताला लगा हुआ था। कांग्रेस ने देश का यह हाल किया था।
श्री नड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और आज इंडी गठबंधन के रूप में बैठे तमाम विपक्षी दलों के लिए प्रजातंत्र एक तरह से धोखा देने का माध्यम है और उनकी पूरी सोच प्रजातंत्र विरोधी है। यदि जवाहरलाल नेहरू की बात की जाए, तो उन्होंने आठ बार से अधिक राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया। इंदिरा गांधी ने 50 बार राष्ट्रपति शासन लगाया, यानी 50 चुनी हुई सरकारों को ध्वस्त किया। यदि आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की 12 साल की सरकार को देखा जाए, तो जम्मू-कश्मीर को छोड़कर और कुछ समय के लिए मणिपुर को छोड़कर कहीं भी राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया गया। यही उनकी ताकत है। इसी कारण इमरजेंसी के दौरान 42वाँ संवैधानिक संशोधन लाया गया, जिसमें चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि याद कीजिए, कानून किस तरीके से बनाया गया। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और स्पीकर जैसे पदों को न्यायिक समीक्षा से ऊपर रखने का प्रयास किया गया, ताकि उनके खिलाफ कोई न्यायिक कार्रवाई न हो सके। सबसे बड़ी बात यह थी कि इस कानून को रेट्रोस्पेक्टिव बनाया गया। सामान्यतः कोई भी कानून आगे के लिए लागू होता है, लेकिन इसे पीछे से लागू किया गया। यानी जस्टिस जगमोहन सिन्हा के जो वक्तव्य थे और जो उनका फैसला था, उसे भी निरस्त करने का काम किया गया। इस तरह प्रजातंत्र और न्यायपालिका का गला घोंटने का काम किया गया और आज वही कांग्रेस पार्टी के लोग उन्हें प्रजातंत्र की दुहाई देते हैं।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि हमें तो कई बार हँसी आती है कि उनके पोते और पोती दोनों संविधान की किताब लेकर घूमते रहते हैं। क्या उन्होंने कभी संविधान की कोई धारा पढ़ी है? क्या उन्हें कुछ मालूम है? संविधान की किताब उठाने से पहले राहुल गांधी को अपनी दादी के किए हुए कार्यों के लिए देश से माफी माँगनी चाहिए। देश को बताया जाना चाहिए कि उनकी दादी ने गलत काम किया। आज कांग्रेस संविधान की रक्षक बन गई है और घड़ियाली आँसू बहा रही है, जबकि इन लोगों को संविधान का एक भी प्रावधान मालूम नहीं है। उन्हें यह भी नहीं मालूम कि उनकी दादी ने क्या-क्या किया और किस तरीके से प्रावधानों की धज्जियाँ उड़ाई थीं। आज ये लोग 21वीं शताब्दी में खड़े होकर प्रजातंत्र की बात करते हैं और स्वयं को संविधान का रक्षक बताते हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने एक बार नहीं, अनेकों बार संविधान की धज्जियाँ उड़ाई हैं। इंदिरा गांधी ने ऐसा किया था, इसलिए यदि देश से माफी माँगनी है तो उन्हें माँगनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान फंडामेंटल राइट्स के संबंध में उस समय के सॉलिसिटर जनरल डे साहब ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि व्यक्ति की आजादी पर न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार न्यायपालिका को नहीं है। इमरजेंसी के दौरान इस प्रकार की बातें कही गईं। सी.एम. स्टीफन ने संसद में कहा था कि संविधान में अब ऐसा प्रावधान कर दिया गया है कि संसद पर कोई भी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती और सुप्रीम कोर्ट कुछ नहीं कर सकती। ऐसी परिस्थिति देश के सामने खड़ी की गई थी। इसलिए जब संविधान दिवस, संविधान हत्या दिवस और लोकतंत्र की हत्या दिवस को याद किया जाता है, तब इन सभी बातों को जानना बहुत जरूरी है। हम अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानते हैं कि आजादी की लड़ाई के बाद जो सबसे बड़ी लड़ाई जयप्रकाश नारायण आंदोलन के रूप में लड़ी गई, उसमें हमें भी शामिल होने का अवसर मिला।
श्री नड्डा ने कहा कि हमें वह दिन याद है, जब जयप्रकाश जी बीमार अवस्था में बिल्कुल कमजोर हो चुके थे। उन्हें पीजीआई, चंडीगढ़ से डिस्चार्ज किया गया था और वह कुछ दिनों के लिए यहाँ आए थे। रमाकांत पांडे जी यहाँ बैठे हैं, जिन्होंने उन्हें दरभंगा हाउस के काली मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए बुलाया था। उस समय मैं और रविशंकर प्रसाद पटना कॉलेज के छात्र हुआ करते थे, जबकि जयप्रकाश नारायण जी पटना यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। हमने छात्रों को इकट्ठा किया और जब जयप्रकाश नारायण जी पूजा करने आए, तो उनकी पूजा-अर्चना के बाद हम लोगों ने नारे लगाए, “लोकनायक जयप्रकाश आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।” जयप्रकाश नारायण जी को तो जाने दिया गया, लेकिन वे सब लोग जब क्लास में गए, तो 15 मिनट के भीतर पूरी की पूरी क्लास को गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय इस प्रकार की घटनाएँ होती थीं और कॉलेज के प्रांगण भी छावनी में बदल चुके थे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब आज संविधान हत्या दिवस और लोकतंत्र हत्या दिवस को याद किया जाता है, तो याद करने के साथ-साथ एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कांग्रेस की नस्ल अब भी नहीं बदली है। वही सोच आज भी कायम है; रस्सी जल गई है, लेकिन बल नहीं गया है, ऐंठन नहीं गई है और सोच नहीं बदली है। इसलिए यदि प्रजातंत्र को मजबूत रखना है, तो कांग्रेस को हमेशा यह याद दिलाते रहना होगा और उसे सत्ता से दूर रखना होगा। यह हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। यदि आज इंडी अलायंस की गतिविधियों को देखा जाए, तो उनका उद्देश्य देश को मजबूत बनाना नहीं, बल्कि सत्ता की लोलुपता में हर उस कार्यक्रम में अपने आप को शामिल करना है जो राष्ट्रविरोधी हो। यही इंडी अलायंस का तौर-तरीका बन गया है। 10 दिन पहले अशोक गहलोत, जो उस समय यूथ कांग्रेस के नेता हुआ करते थे और बाद में लंबे समय तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने कहा कि यदि श्रीमती इंदिरा गांधी जैसी नेता होतीं, तो भारतीय जनता पार्टी पर बैन लगा देतीं। इससे साफ है कि उनकी सोच आज भी नहीं बदली है। श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि आज यह आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है और जनता ने उन्हें बैठाया है, इसलिए देश तरक्की के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। यदि कांग्रेस का बस चले, तो ये देश को फिर उसी पाताल में ले जाएँगे, जहाँ 2014 से पहले ले गए थे और ऐसा करने में कभी नहीं हिचकेंगे। यदि इमरजेंसी की बात याद की जाए, तो आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और आज भी इनके वक्तव्य आरएसएस तथा देशभक्तों के प्रति वैसे ही रहते हैं। इनका रुख हमेशा देशभक्ति के खिलाफ रहता है और यह बात हम सबके ध्यान में है। संविधान हत्या दिवस वह यथार्थ है, जिसे देश ने देखा है। आजाद भारत में जयप्रकाश नारायण जी के नेतृत्व में जो बड़ा जन आंदोलन खड़ा हुआ, उसने प्रजातंत्र पर हुए उस कुठाराघात का, जो ब्रिटिश शासन से भी अधिक था, मुंहतोड़ जवाब दिया। लोकतंत्र हत्या दिवस को याद करते हुए ऐसे लोगों की उस मानसिकता को कुचलना होगा, जिनकी सोच और मानसिकता प्रजातंत्र को कुचलने की रही है।
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