"स्वीकृति का सुख"
पंकज शर्मा
मित्रों प्रायः मनुष्य अपनी प्रसन्नता का स्रोत दूसरों की स्वीकृति में खोजता है। वह सबको संतुष्ट रखने के प्रयास में अपने विचारों, भावनाओं एवं यहाँ तक कि अपने सत्य से भी समझौता करने लगता है। किंतु यह मार्ग अंततः थकान, असंतोष एवं आत्मविस्मृति की ओर ले जाता है। जो व्यक्ति हर किसी को प्रसन्न करने का दायित्व अपने ऊपर ले लेता है, वह धीरे-धीरे स्वयं से दूर होता जाता है।
वास्तविक सुख तब जन्म लेता है जब मनुष्य यह स्वीकार कर लेता है कि सभी को प्रसन्न करना न तो संभव है एवं न ही आवश्यक। जीवन का उद्देश्य सर्वसम्मति अर्जित करना नहीं, बल्कि अपने विवेक, मूल्यों एवं अंतःकरण के प्रति ईमानदार बने रहना है। जब बाहरी प्रशंसा की अपेक्षा घटती है, तब आत्मस्वीकृति का प्रकाश प्रकट होता है; एवं उसी प्रकाश में वह शांति मिलती है, जिसे संसार भर की स्वीकृतियाँ भी नहीं दे सकतीं।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews