वैश्विक कल्याण का महामार्ग: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
सत्येन्द्र कुमार पाठक
"योग: समत्वं योग उच्यते।"अर्थात, अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ही परिस्थितियों में मानसिक रूप से स्थिर रहना ही योग है। प्राचीन काल से भारत की इस अनमोल धरोहर ने मानवता को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया है। आज योग किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस व इंटरनेशनल डे ऑफ योगा इसी वैश्विक एकजुटता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सबसे बड़ा प्रतीक है।।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना की कहानी आधुनिक कूटनीति और प्राचीन भारतीय दर्शन के मिलन का एक अद्भुत उदाहरण है। इसकी शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और उनके द्वारा किए गए प्रयासों से हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐतिहासिक प्रस्ताव।सितंबर 2014 में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 69वें सत्र को संबोधित करते हुए पहली बार दुनिया के सामने 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' मनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अपने भाषण में कहा था:"योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता, विचार और कर्म, संयम और पूर्ति, तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है। यह केवल व्यायाम के बारे में नहीं है, बल्कि अपने आप के साथ, दुनिया और प्रकृति के साथ एकता की भावना की खोज करने के बारे में है।"
प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। : इस प्रस्ताव का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह था कि इसे संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य देशों द्वारा सह-प्रायोजित (Co-sponsored) किया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में किसी भी संकल्प (Resolution) के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी। आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र में किसी भी प्रस्ताव को पारित होने में लंबा समय लगता है, लेकिन योग की सार्वभौमिक अपील को देखते हुए मात्र 90 दिनों के भीतर, 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने संकल्प 69/131 द्वारा 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में घोषित कर दिया। इसके बाद, 21 जून 2015 को दुनिया भर में पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें दिल्ली के राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स अपने नाम किए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून की तारीख का चयन यूं ही नहीं किया गया, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं।
ग्रीष्म संक्रांति 21 जून पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। इस खगोलीय घटना को 'ग्रीष्म संक्रांति' कहा जाता है। इसके बाद सूर्य दक्षिणायन (सूर्योदय का दक्षिण की ओर खिसकना) होने लगता है। वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से यह समय संक्रमण और रूपांतरण का होता है। जिस प्रकार यह दिन दीर्घायु (लंबा) होता है, उसी प्रकार नियमित योग का अभ्यास भी मनुष्य को दीर्घायु और निरोगी जीवन प्रदान करता है।
भारतीय संस्कृति और यौगिक परंपरा के अनुसार, इस दिन का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है:
प्रथम गुरु के रूप में शिव: भगवान शिव को योग परंपरा में 'आदि योगी' (पहले योगी) और 'आदि गुरु' (पहले गुरु) माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी ग्रीष्म संक्रांति के दिन आदि योगी भगवान शिव ने अपनी साधना पूरी कर, पहली बार अपने शिष्यों यानी सप्तऋषियों (सात ऋषियों) को योग का ज्ञान देना शुरू किया था। इसी दिन से योग की विद्या का प्रसार मानव जाति में होना शुरू हुआ। इसलिए, 21 जून को योग की परंपरा की शुरुआत या इसके अवतरण का प्रतीक माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य किसी धर्म या संप्रदाय का प्रचार करना नहीं, बल्कि इस प्राचीन भारतीय परंपरा के माध्यम से दुनिया भर में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझे जा सकते हैं । लोगों को केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन के प्रति भी जागरूक करना। मानसिक तनाव से मुक्ति आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी, डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रही मानवता को प्राणायाम और ध्यान के जरिए शांति प्रदान करना। प्रकृति के साथ जुड़ाव में मानव और पर्यावरण के बीच के संतुलन को बनाए रखना और एक स्थायी जीवनशैली को बढ़ावा देना। वैश्विक बंधुत्व योग के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को बिना किसी भेदभाव के एक सूत्र में पिरोना है।
2015 से लेकर अब तक, हर साल 21 जून को दुनिया के कोने-कोने में योग दिवस का आयोजन किया जाता है। एफिल टॉवर (पेरिस) के सामने से लेकर टाइम्स स्क्वायर (न्यूयॉर्क) तक, और बर्फीले हिमालय की चोटियों से लेकर समुद्र के भीतर नौसेना के जहाजों तक—हर जगह लोग योग करते नजर आते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक गाइडलाइंस के तहत हर साल इस दिवस के लिए एक विशेष थीम (Theme) तय की जाती है, जो समकालीन वैश्विक चुनौतियों को दर्शाती है। जैसे—"स्वास्थ्य के लिए योग", "घर पर योग और परिवार के साथ योग" (महामारी के दौरान), और "मानवता के लिए योग"। ये थीम दुनिया को यह संदेश देती हैं कि योग संकट के समय में मानसिक संबल और शारीरिक इम्युनिटी बढ़ाने का अचूक साधन है।
आज की 21वीं सदी में, जहाँ तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे—डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा और हृदय रोग) को भी बढ़ाया है। ऐसे में योग एक चिकित्सा पद्धति से कहीं बढ़कर एक सुरक्षा कवच के रूप में उभरा है। आसनों के नियमित अभ्यास से शरीर लचीला, मजबूत और सुडौल बनता है। यह शरीर के आंतरिक अंगों और रक्त परिसंचरण को दुरुस्त रखता है। प्राणायाम (श्वसन क्रियाएं) और ध्यान मस्तिष्क को शांत करते हैं, जिससे कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। योग व्यक्ति में अनुशासन पैदा करता है। यह हमें सात्विक आहार और उचित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हर दिन अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का एक वैश्विक संकल्प है। भारत के इस अनमोल उपहार को आज पूरी दुनिया ने सहर्ष स्वीकार किया है, क्योंकि यह धर्म, भाषा और सीमाओं के बंधनों से परे है। यदि हम वास्तव में एक स्वस्थ, शांत और समृद्ध विश्व का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। आइए, इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम स्वयं से यह प्रतिज्ञा करें कि हम योग को अपनाएंगे और "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" (सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों) के प्राचीन भारतीय विज़न को साकार करेंगे।करपी , अरवल बिहार 804419
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