"मन और मनोवृत्ति का सेतु"
पंकज शर्मा
मित्रों मन विचारों का उद्गम-स्थल है। उसमें असंख्य संभावनाएँ, कल्पनाएँ एवं संकल्प जन्म लेते हैं; किंतु केवल विचारों का होना ही प्रगति का प्रमाण नहीं है। विचार तो मेघों के समान आते-जाते रहते हैं, पर उनकी दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति मनोवृत्ति होती है। यदि मनोवृत्ति सकारात्मक, व्यापक एवं कर्मप्रधान हो, तो साधारण विचार भी असाधारण उपलब्धियों का आधार बन जाते हैं।
वास्तव में जीवन की उन्नति मन की क्षमता से अधिक मनोवृत्ति की परिपक्वता पर निर्भर करती है। मन अवसरों को देखता है, जबकि मनोवृत्ति उन्हें साधने का साहस प्रदान करती है। यही कारण है कि समान प्रतिभा रखने वाले व्यक्तियों में भी उपलब्धियों का अंतर दिखाई देता है। जो अपने विचारों एवं दृष्टिकोण के मध्य सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं, वे प्रगति को केवल प्राप्त नहीं करते, बल्कि उसे अपने व्यक्तित्व का स्वाभाविक विस्तार बना लेते हैं।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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