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काश! समाज और भाजपा ने भोला मिश्रा के जीवन का सही मूल्यांकन किया होता : डॉ. विवेकानंद मिश्र

काश! समाज और भाजपा ने भोला मिश्रा के जीवन का सही मूल्यांकन किया होता : डॉ. विवेकानंद मिश्र

  • बोधगया के वरिष्ठ भाजपा नेता स्व. भोला मिश्रा की स्मृति में आयोजित हुई भावपूर्ण शोकसभा, वक्ताओं ने उनके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को किया याद

गया, बोधगया।
बोधगया प्रखंड के बकरौर ग्राम निवासी एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, समाजसेवी तथा जनसंघ काल से राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्पित कार्यकर्ता रहे स्वर्गीय भोला मिश्रा की स्मृति में ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर एक भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी शोकसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक, साहित्यिक, धार्मिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लेकर दिवंगत नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

शोकसभा का प्रारंभ स्वर्गीय भोला मिश्रा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भोला मिश्रा का संपूर्ण जीवन समाज, राष्ट्र और संगठन की सेवा के लिए समर्पित रहा। सभा की अध्यक्षता कर रहे ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने अपने उद्बोधन में अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि यदि समाज और जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक ने उनके योगदान का सही मूल्यांकन किया होता तो आज उनका व्यक्तित्व राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श समाजसेवी और जननेता के रूप में स्थापित होता।

डॉ. मिश्र ने कहा कि स्वर्गीय भोला मिश्रा का जन्म भले ही एक साधारण परिवार में हुआ था, किंतु उनके विचार, उनकी संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण असाधारण था। उन्होंने जीवनभर गरीबों, वंचितों, किसानों, मजदूरों तथा उपेक्षित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। बकरौर और बोधगया क्षेत्र में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, वृद्धावस्था पेंशन, भूमिहीनों के अधिकार और निर्धन कन्याओं के विवाह जैसे अनेक जनहित के मुद्दों पर उन्होंने आंदोलन चलाए और लोगों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि भोला मिश्रा उन विरले व्यक्तित्वों में थे जिनके लिए राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का साधन थी। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया।

प्रख्यात साहित्यकार आचार्य राधा मोहन मिश्र ‘माधव’ ने स्वर्गीय भोला मिश्रा को एक संत-स्वभाव का योद्धा बताते हुए कहा कि उन्होंने सदैव गरीबों और वंचितों की आवाज बनकर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब राजनीति स्वार्थ और पदलोलुपता से ग्रस्त होती जा रही है, तब भोला मिश्रा का जीवन त्याग, सेवा और समर्पण की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत करता है।

आचार्य कुमुद मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि भोला मिश्रा जैसे व्यक्तित्व शताब्दियों में जन्म लेते हैं। उनका निधन केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने पीछे केवल स्मृतियां नहीं छोड़ते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमिट स्रोत बन जाते हैं।

सभा को संबोधित करते हुए आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने स्वर्गीय भोला मिश्रा के राजनीतिक जीवन की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनका अत्यंत आत्मीय और वैचारिक संबंध था। वाजपेयी जी के नेतृत्व में उन्होंने राष्ट्रवाद, सुशासन और संगठन विस्तार के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य किया। गया जिले में भारतीय जनता पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि भोला मिश्रा उन आधार स्तंभों में शामिल थे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी संगठन को मजबूती प्रदान की, किंतु दुर्भाग्यवश संगठन और नेतृत्व ने उनके समर्पण के अनुरूप उन्हें कभी कोई बड़ा पद या महत्वपूर्ण दायित्व नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और एक निष्काम कर्मयोगी की भांति संगठन तथा समाज की सेवा में लगे रहे।

अपने अध्यक्षीय एवं समापन संबोधन में डॉ. विवेकानंद मिश्र ने गहरी वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर्गीय भोला मिश्रा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा समाजसेवी कभी पद और प्रतिष्ठा का मोह नहीं करता। उन्होंने कहा कि भोला बाबू ने समाज और संगठन के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यहां तक कि उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति तक समाज और संगठन के कार्यों में लगा दी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे वास्तविक अधिकारी थे।

डॉ. मिश्र ने कहा कि समाज के तथाकथित उच्च वर्गों तथा भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके योगदान का उचित सम्मान नहीं किया। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जीवित रहते हुए उन्हें कोई प्रभावी दायित्व नहीं दिया गया और मरणोपरांत भी उनके योगदान के अनुरूप सम्मान देने की दिशा में कोई गंभीर पहल दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई अवसरों पर उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया गया और उनके समर्पण का अपेक्षित सम्मान नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि भोला मिश्रा का मूल्यांकन किसी पद, कुर्सी या राजनीतिक उपलब्धि से नहीं किया जा सकता। उनका वास्तविक मूल्यांकन उन हजारों लोगों की आंखों में देखा जा सकता है जिनकी सहायता उन्होंने अपने जीवनकाल में की। वे जन-जन के नेता थे और सदैव रहेंगे।

डॉ. मिश्र ने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे स्वर्गीय भोला मिश्रा के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा भारतीय जनता पार्टी सहित समाज के विभिन्न संगठनों से मांग करें कि इस महान कर्मयोगी और समर्पित कार्यकर्ता के योगदान को मरणोपरांत उचित सम्मान प्रदान किया जाए।

शोकसभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कार्यक्रम का समापन अत्यंत भावुक वातावरण में हुआ। उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय भोला मिश्रा का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, संघर्ष, त्याग और समर्पण की प्रेरक गाथा बना रहेगा।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में आचार्य लालभूषण मिश्र, संदीप कुमार मिश्र, संदीप मिश्र, प्रचंड बाबा, पंडित बालमुकुंद मिश्र, तांत्रिक दीपक बाबा, आचार्य सुनील पाठक, हरी नारायण त्रिपाठी, सत्येंद्र दूबे, शंभू गिरी, अमरनाथ मिश्र, डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, रणजीत पाठक, पवन मिश्र, विश्वजीत चक्रवर्ती, समाजसेवी डिंपल कुमारी, मनीष कुमार, अच्युत अनंत मराठे, किरण पाठक, बृजेश राय, नीलम पासवान, फूल कुमारी, गौरव कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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