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मेरी अन्तिम अभिलाषा

मेरी अन्तिम अभिलाषा

डॉ अनमोल कुमार

मृत्योपरांत त्वरित संपूर्ण देहदान *दधीचि देहदान समिति*, पटना को कर दिया जाए।
मेरे द्वारा संकल्प पत्र भर दिया गया है। इसके लिए एक समारोह में बिहार के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल मो० आरिफ खान और त्रिपुरा के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल, गंगा प्रसाद द्वारा सम्मान पत्र और प्रतीक चिह्न मुझे सम्मानित किया गया।

क्योंकि ? -

"मरता है, शरीर अमर है आत्मा
देहदान से मिलता है, परमात्मा"


मृत्यु को जीवन का अन्त ना बताएं, उठाएं कदम, करें संकल्प, अंगदान को चुने विकल्प।।


गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि शरीर नश्वर है, इसे दान कर देना ही सबसे बड़ी साधना है।


*संकल्प*


मैं न तो राज्य प्राप्ति की कामना करता हूँ और न ही स्वर्ग या मोक्ष की इच्छा रखता हूँ। मेरी एक मात्र कामना है कि दुख भंजन नाथ ही रोग एवं कष्ट से मुक्त हो जाए क्योंकि नर ही नारायण है।


*महर्षि दधीचि ऋषि*
अगर महर्षि दधीचि ऋषि ने देव और मानव कल्याण के लिए शरीर त्याग कर अपना हड्डी ( अस्ति ) भगवान इन्द्र को दान नहीं करते, तो देवलोक और पृथ्वीलोक को राक्षस वृत्रासुर के अत्याचार से मुक्ति नहीं मिल पाता।


*भारत में देहदान / नेत्रदान की जरूरत*


*1.2 करोड़ लोग आंख और कार्निया के शिकार है, इनमें से दो लोगों को भी आंख की रोशनी मिलेगी और वह संसार देख सकते हैं तो यह मेरे जीवन की सार्थकता होगी।


*25 लाख लोग अंग से After है, उनके सापेक्षिक अंगों का प्रत्यारोपण कर उन्हें नवजीवन प्रदान करेंगे , तो मैं धन्य हो जाऊंगा।


*प्रशिक्षु चिकित्सक शैल्य चिकित्सा का प्रयोग कर कौशल प्राप्त करते हुए रोग विशेषज्ञ एवं नया दवाओं का अनुसंधान और शोध कर लाखों लोगों को प्राणदान देंगे, यह हमारे लिए सबसे बढ़कर उपलब्धि होगी।


अंन्तोगत्वा दधीचि देहदान समिति द्वारा शेष अंगों का ससम्मानपूर्वक अत्येष्टि भी कर देंगे।


लेखक :-अनमोल कुमार
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