बाल श्रम के खिलाफ एकजुट हो दुनिया: आचार्य कुल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्येन्द्र
जहानाबाद। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आचार्य कुल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्येन्द्र कुमार पाठक ने बाल श्रम को समाज के लिए एक गंभीर कलंक बताया। उन्होंने कहा कि हर साल 12 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें याद दिलाता है कि मासूम बच्चों का स्थान कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि स्कूलों में है।इस विशेष दिवस की शुरुआत वर्ष 2002 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बाल श्रम के बढ़ते चलन पर प्रभावी रोक लगाना और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है। आज भी दुनिया भर में लाखों मासूम बच्चे अपनी बुनियादी शिक्षा से वंचित होकर गुलामी, जबरन मजदूरी और तस्करी जैसी खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। "बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन, गरिमा और आत्मनिर्भरता से वंचित कर देता है। यह खासकर गरीब और विकासशील देशों में एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।" सत्येन्द्र कुमार पाठक, राष्ट्रीय प्रवक्ता (आचार्य कुल) ने जोर देकर कहा कि यह दिवस सरकारों, नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाता है ताकि गरीबी और शिक्षा की कमी जैसे बाल श्रम के मूल कारणों को खत्म किया जा सके। उन्होंने सभी से एकजुट होकर बच्चों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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