Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"उच्च लक्ष्य, जागृत संभावना"

"उच्च लक्ष्य, जागृत संभावना"

पंकज शर्मा
प्रिय मित्रों एक मनुष्य की वास्तविक सीमा उसकी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उसकी संकुचित आकांक्षाएँ होती हैं। जब वह अपने सामर्थ्य का आकलन केवल वर्तमान उपलब्धियों से करता है, तब उसके स्वप्न छोटे हो जाते हैं। जीवन का सत्य यह है कि ऊँचे लक्ष्य भले ही तत्काल न मिलें, किंतु उनकी ओर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम व्यक्तित्व को विस्तार, साहस एवं आत्मबोध प्रदान करता है।

जो लक्ष्य सहजता से प्राप्त हो जाए, वह प्रायः अंतर्निहित शक्तियों को सुप्त ही रहने देता है। संघर्षपूर्ण शिखरों की अभिलाषा ही मनुष्य को उसकी अनंत संभावनाओं से परिचित कराती है। अतः सफलता का माप केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि वह ऊँचाई है जहाँ तक पहुँचने का साहस हमने किया। यही साहस साधारण जीवन को असाधारण बना देता है।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ