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हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला

समय बदलता रहा, पीढ़ियाँ बदलती रहीं,
पर हर युग अपने साथ एक नई सोच, नई पहचान और नया उजाला लेकर आया।
त्याग से तकनीक तक और संस्कारों से ए.आई. तक की इस अनोखी यात्रा को काव्य में बाँधने का एक छोटा सा प्रयास —

हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला

कुमार महेंद्र
1901 से 1927 की पीढ़ी,
ग्रेटेस्ट जेनरेशन कहलायी।
त्याग, अनुशासन, राष्ट्र-प्रेम की,
ज्योति हृदय में सदा जलायी।
संघर्षों की अग्नि-परीक्षा में,
स्वर्ण-सा खुद को तप डाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


1928 से 1945 तक फिर,
साइलेंट पीढ़ी का आगमन।
संस्कारों की शीतल छाया,
मर्यादा जिसका आभूषण।
सादगी, सेवा और संयम से,
जीवन-पथ सुंदर सँभाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


1946 से 1964 तक,
बेबी बूमर्स का युग आया।
परिश्रम और दृढ़ संकल्प से,
उन्नति का नव दीप जलाया।
स्नेहिल पथदर्शक बनकर,
शिक्षा से जीवन को पाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


1965 से 1980 तक फिर,
जेनरेशन एक्स ने जन्म लिया।
कर्तव्य, परिवार और श्रम को,
जीवन का आधार किया।
संघर्षों के कठिन दौर में,
जपी उत्तरदायित्व की माला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


1981 से 1996 में,
मिलेनियल्स का भव्य काल।
वैश्विक सोच और सपनों से,
दमक उठा विश्व का भाल।
तकनीक और नव कल्पनाओं ने,
किया प्रगति का उजियाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


1997 से 2012 तक के,
जेन ज़ी जूमर्स बन छायी।
इंटरनेट की रंगीन दुनिया संग,
तकनीकी चेतना फैलायी।
हर क्षण बदलती दुनिया में,
खुद को हर रूप में ढाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


2013 से आगे बढ़ती,
अल्फा पीढ़ी का उजियाला।
ए.आई. की नव किरणों ने,
भविष्य का आकाश सँभाला।
डिजिटल युग की तीव्र गति बनी,
ज्ञान-विज्ञान की नव ज्वाला।
हर पीढ़ी का अंदाज़ निराला।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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