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श्री नटवर साहित्य परिषद् की मासिक कवि गोष्ठी सम्पन्न, कवियों की रचनाओं से गूंजा मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर, 28 जून। श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट, छोटी सरैयागंज, मुजफ्फरपुर के सभागार में रविवार को श्री नटवर साहित्य परिषद् के तत्वावधान में मासिक कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। साहित्य, संस्कृति और काव्य रस से सराबोर इस आयोजन में शहर के वरिष्ठ एवं युवा कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक ने की, जबकि मंच संचालन युवा शायर उमेश राज ने प्रभावशाली ढंग से किया। गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रकवि आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री के महावाणी स्मरण के साथ हुआ।
हास्य-व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. जगदीश शर्मा ने अपनी चर्चित रचना "गरजे बादल शहर में जाकर, बरसे गाँव के खेतों में" प्रस्तुत कर समसामयिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य किया। ओम प्रकाश गुप्ता ने "समय को समय पर पहचानिए हुजूर, कौन अपना कौन पराया जानिए जरूर" के माध्यम से जीवन की यथार्थपरक सीख दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अंजनी कुमार पाठक ने अपनी भावपूर्ण प्रार्थना "हे माँ, जग का कल्याण करो" सुनाकर वातावरण को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। वहीं युवा शायर उमेश राज ने अपनी ग़ज़ल "दस्ते सहरा में कोई जुगनू झिलमिलाता तो है, वो चाँद मुझे देखकर दूर से मुस्कुराता तो है" प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।
कवि अशोक भारती ने "नाम दुनिया में हो रौशन, राह कुछ ऐसी चुनो; गर्व हो सबको तुम्हीं पर, काम कुछ ऐसा करो" के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया। अरुण कुमार तुलसी ने "कैसी तूने माया रची भगवान, स्वार्थ में अंधा बना इंसान" सुनाकर मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया। वहीं परशुराम प्रसाद ब्याहुत की रचना "सात आश्चर्य" ने अपनी मौलिकता और प्रस्तुति से श्रोताओं की भरपूर तालियाँ बटोरीं।
गोष्ठी में श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष रणवीर अभिमन्यु, नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन सिन्हा, पप्पू निशात, नंदकिशोर पोद्दार, सुरेंद्र कुमार, चिराग पोद्दार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं श्रोतागण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में मासिक कवि गोष्ठी के संयोजक डॉ. जगदीश शर्मा ने सभी कवियों, अतिथियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अध्यक्ष की अनुमति से अगली मासिक कवि गोष्ठी तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।यह आयोजन एक बार फिर सिद्ध कर गया कि मुजफ्फरपुर की साहित्यिक परंपरा आज भी जीवंत है और ऐसे मंच नई पीढ़ी के रचनाकारों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का सशक्त अवसर प्रदान कर रहे हैं।
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