Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

गुस्सा आया

गुस्सा आया

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
धर्म नाम पर तुष्टिकरण, तो गुस्सा आया,
हिन्दू ने प्रतिरोध किया, तो ग़ुस्सा आया।


मची खलबली, धर्मनिरपेक्ष पाखंडियों में,
है सोया हिन्दू जाग रहा, तो ग़ुस्सा आया।


धर्म भीरू मानवतावादी, जो सोया रहता था,
अन्याय का प्रतिकार किया, तो ग़ुस्सा आया।


कब तक मौन रह, चुप चुप सहता रहता,
हुआ मौन प्रतिरोध मुखर, तो ग़ुस्सा आया।


शास्त्रों ने बतलाया, शस्त्र शास्त्र का संगम,
आत्म रक्षा मे शस्त्र उठाया, तो ग़ुस्सा आया।


मर्यादा पुरुषोत्तम राम, सदा धनुष संग रखते,
धर्म मार्ग के अनुगामी हम, तो ग़ुस्सा आया।


सौ अपराध तक माफ़ी वादा, किया कृष्ण ने,
शिशुपाल का वध हुआ, तो ग़ुस्सा आया।


कब तक सहन करें पापी को, सहन नहीं होता,
प्रतिक्रिया में अभी ज़रा उठे, तो ग़ुस्सा आया।


जन्म लिया यदि धरा पर, मरना निश्चित है,
चले कफ़न बाँध सर पर, तो ग़ुस्सा आया।


नहीं सहेंगे राष्ट्र विरोधी, आक्रांताओं को भारत में,
बहुत निभाया भाईचारा, अब हमको ग़ुस्सा आया।


क्रिया की प्रतिक्रिया होती, यह शाश्वत सत्य,
काल बनेगा महाकाल, माँ काली को ग़ुस्सा आया।


धर्म और मानवता की हित, हिंसा उचित बतायी,
कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु वध, कान्हा को ग़ुस्सा आया।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ