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भरत भूषण तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच पर उठे गंभीर सवाल, आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न: अजय वर्मा

भरत भूषण तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच पर उठे गंभीर सवाल, आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न: अजय वर्मा

आरा। 
भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय वर्मा ने सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की हत्या की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस आयोग का गठन सत्य को सामने लाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया गया है, उसकी कार्यप्रणाली प्रारंभ से ही संदेह के घेरे में दिखाई दे रही है।

अजय वर्मा ने कहा कि यदि जांच आयोग के अध्यक्ष या सदस्य ऐसे व्यक्तियों के साथ घटनास्थल अथवा मृतक के गांव का दौरा करते हैं, जिन पर स्वयं इस मामले में संलिप्तता के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो इससे जांच की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवार और आम जनता का आयोग पर विश्वास कमजोर पड़ता है तथा निष्पक्ष जांच की संभावना प्रभावित होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भरत भूषण तिवारी का मामला केवल एक सामान्य आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इसकी गहराई से और स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता है। उनके अनुसार भरत भूषण तिवारी लंबे समय से जनहित और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे थे। वे दलितों, पिछड़ों तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहे थे और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

अजय वर्मा ने कहा कि जमनिया पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लिए पिछले वर्षों में खर्च की गई सरकारी राशि के उपयोग को लेकर भारत भूषण तिवारी लगातार सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप है कि विभिन्न विकास योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिनसे संबंधित कई दस्तावेज और सूचनाएं भरत भूषण तिवारी के पास थीं। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं तथ्यों को सार्वजनिक करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।

भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए ताकि सभी तथ्यों का खुलासा हो सके और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक, राजनीतिक अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

उन्होंने बिहार सरकार से मांग की कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जांच आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते रहे तो राज्य सरकार को आयोग के गठन और उसकी कार्यप्रणाली की भी समीक्षा करनी चाहिए।

अजय वर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दे उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। यदि ऐसे लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होती है और जांच पर भी सवाल खड़े होते हैं, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) भरत भूषण तिवारी प्रकरण में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगा तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर आवाज उठाएगा।
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