जब पसीने से तर ब तर हो लूँ
डा रामकृष्णजब पसीने से तर ब तर हो लूँ
चुपके से ऐ हवा आया न कर।
यह समय मेरा जरा मँहगा तो है
अकारण तू भी इसे जाया न कर। ।
हर तरफ हो रही अंधी रेलियाँ
किस अँधैरे में बजेगी घंटियाँ।
बादलों को कहाँ फुरसत है अभी
उसके बदले राग अपनाया न कर।।
आँसुओं से भींगते से पेड़ ये
मुह चिढ़ातेे सूखते से मेड़ ये
किसी जीवन की व्यथा कहते नहीं
उलझशों को और उलझाया न कर।।
कहाँ सागर अकारण है खौलता
षहाडों में कौन है जो बोलता
आदमी के शोर मेे लगता नहींं
सुनेगा संगीत मन गाया न कर।।
छू रहे अट्टालिकाओं के शिखर
गगन,क्षत विक्षत हुए मानव विखर
वेदनाएँ प्राण भेदी हो रहीं
दोमुहे संज्ञान हकलाया न कर।। ३५
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews