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"कर्म तथा समन्वय"

"कर्म तथा समन्वय"

पंकज शर्मा
स्वतंत्रता मनुष्य के भीतर निहित उस दिव्य शक्ति का उद्घाटन करती है, जो उसे वर्तमान क्षण में कर्मरत होने का साहस प्रदान करती है। स्वतंत्र चेतना किसी बाहरी स्वीकृति की प्रतीक्षा नहीं करती; वह अपने संकल्प को ही पथ और अपने पुरुषार्थ को ही साधन बना लेती है। यही कारण है कि एकाकी व्यक्ति अनेक बार शीघ्रता से लक्ष्य की ओर अग्रसर हो जाता है, क्योंकि उसकी गति केवल उसकी इच्छा और कर्मनिष्ठा से संचालित होती है।


किन्तु संग-साथ जीवन का एक उच्चतर आयाम है, जहाँ केवल गति नहीं, अपितु सामंजस्य का मूल्य भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। संबंध हमें यह सिखाते हैं कि साझा यात्रा में उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और धैर्य अनिवार्य हैं। सहयात्रा का सौंदर्य इसी में है कि हम अपने कदमों को दूसरों की लय से जोड़ना सीखते हैं। अतः स्वतंत्रता कर्म की शक्ति देती है, जबकि संग-साथ चरित्र की परिपक्वता और प्रतीक्षा की तपस्या का पाठ पढ़ाता है।


. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा
(कमल सनातनी)
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