संगठन, रिश्ते और स्वार्थ का सच
डॉ. राकेश दत्त मिश्र
जब कोई व्यक्ति किसी संगठन, संस्था, आंदोलन या सामाजिक अभियान की नींव रखता है, तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसेमंद लोगों की होती है। यही कारण है कि अधिकांश संस्थापक प्रारंभिक दौर में अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को साथ लेकर संगठन की शुरुआत करते हैं। उन्हें लगता है कि अपने लोग सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे, संघर्ष के समय कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे और संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएंगे।
किन्तु जीवन और समाज का अनुभव बताता है कि हर रिश्ता निष्ठा का पर्याय नहीं होता। समय के साथ अनेक लोग अपने स्वार्थ, महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिगत लाभ के कारण संगठन से दूरी बना लेते हैं। जो लोग कभी "हम आपके साथ हैं" का दावा करते थे, वही अवसर आने पर यह कहने लगते हैं – "हम आपके हैं कौन?"
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि संगठन निर्माण की कठिन यात्रा का सबसे कटु सत्य है।
संगठन बनाना किसी भवन का निर्माण नहीं है, जहां ईंट और सीमेंट से काम चल जाए। यह मानव स्वभाव, विश्वास, समर्पण और धैर्य की परीक्षा है। प्रारंभ में जब संगठन छोटा होता है, संघर्ष अधिक होता है और लाभ नगण्य होता है, तब लोग उत्साह में साथ जुड़ जाते हैं। लेकिन जैसे ही त्याग की आवश्यकता पड़ती है, समय देने की बात आती है या व्यक्तिगत स्वार्थों पर अंकुश लगाने की जरूरत पड़ती है, कई लोग धीरे-धीरे किनारा करने लगते हैं।
कुछ लोग संगठन को सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी महत्वाकांक्षाओं की सीढ़ी समझते हैं। जब तक उन्हें पद, प्रतिष्ठा, सम्मान या लाभ मिलता रहता है, वे सक्रिय बने रहते हैं। जैसे ही उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, वे संगठन, उसके नेतृत्व और उसके उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगाने लगते हैं। ऐसे लोग संगठन की आत्मा नहीं, बल्कि अवसरवादी यात्री होते हैं।
इतिहास साक्षी है कि महान संगठनों का निर्माण भीड़ ने नहीं, बल्कि समर्पित व्यक्तियों ने किया है। भगवान राम के साथ पूरी अयोध्या नहीं थी, लेकिन हनुमान जैसे समर्पित सहयोगी थे। भगवान कृष्ण के साथ समस्त यादव समाज नहीं था, लेकिन अर्जुन जैसा विश्वासपात्र मित्र था। छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ लाखों लोग नहीं थे, लेकिन कुछ निष्ठावान मावले थे जिन्होंने इतिहास बदल दिया।
इसलिए किसी भी संगठन की शक्ति संख्या में नहीं, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की निष्ठा में होती है।
संगठन चलाने वाले व्यक्ति को एक और बात समझनी चाहिए कि रिश्तेदारी और संगठनात्मक योग्यता दो अलग-अलग विषय हैं। केवल इसलिए कि कोई रिश्तेदार है या मित्र है, वह संगठन का योग्य सहयोगी भी होगा, यह आवश्यक नहीं। संगठन में स्थान योग्यता, समर्पण और कार्यक्षमता के आधार पर मिलना चाहिए, न कि केवल संबंधों के आधार पर।
जब कोई व्यक्ति संगठन छोड़कर यह कहता है कि "हम आपके हैं कौन?", तब वास्तव में वह अपने चरित्र का परिचय देता है। क्योंकि संगठन किसी व्यक्ति का निजी साम्राज्य नहीं होता; वह एक विचार, उद्देश्य और मिशन का नाम होता है। जो लोग विचार के लिए जुड़े होते हैं, वे परिस्थितियां बदलने पर भी साथ रहते हैं। लेकिन जो लोग व्यक्ति या लाभ के लिए जुड़े होते हैं, वे अवसर समाप्त होते ही दूर हो जाते हैं।
सच्चाई यह है कि संगठन का निर्माण जितना कठिन नहीं, उससे कहीं अधिक कठिन है सही लोगों की पहचान करना। समय सबसे बड़ा परीक्षक है। जो लोग संघर्ष में साथ रहते हैं, वही वास्तव में संगठन की रीढ़ होते हैं। बाकी लोग परिस्थितियों के अनुसार आते-जाते रहते हैं।
अतः किसी भी संस्थापक को लोगों के आने-जाने से निराश नहीं होना चाहिए। यदि कुछ स्वार्थी लोग साथ छोड़ देते हैं, तो इसे हानि नहीं, बल्कि संगठन की शुद्धि समझना चाहिए। क्योंकि संगठन तब मजबूत होता है जब उसके आसपास केवल वे लोग रह जाते हैं जो उद्देश्य के प्रति समर्पित हों, न कि व्यक्तिगत लाभ के प्रति।
अंततः याद रखना चाहिए कि संगठन व्यक्ति से बड़ा होता है, विचार संगठन से बड़ा होता है और समाजहित का उद्देश्य सबसे बड़ा होता है। जो लोग इस सत्य को समझ लेते हैं, वे कभी यह नहीं पूछते – "हम आपके हैं कौन?"
वे गर्व से कहते हैं – "हम उस विचार के हैं, जिसके लिए यह संगठन खड़ा किया गया है।"
यही संगठन की वास्तविक शक्ति है, और यही उसकी स्थायी सफलता का आधार।
लेखक डॉ. राकेश दत्त मिश्र दिव्य रश्मि के सम्पादक है |
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews