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20वें सांख्यिकी दिवस पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, पटना में कार्यक्रम आयोजित

20वें सांख्यिकी दिवस पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, पटना में कार्यक्रम आयोजित

पटना, 29 जून 2026।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (क्षेत्र संचालन प्रभाग), क्षेत्रीय कार्यालय, पटना में 20वें सांख्यिकी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपमहानिदेशक श्री रोशन लाल साहू ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में कार्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जून को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान सांख्यिकीविद्, अर्थशास्त्री और योजनाकार प्रशांत चंद्र महालनोबिस के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर सांख्यिकी के महत्व, नीति निर्माण में आंकड़ों की भूमिका तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में विश्वसनीय आंकड़ों के योगदान पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में उप महानिदेशक श्री रोशन लाल साहू ने बताया कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (National Statistics Day) क्यों मनाया जाता है?
भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जून को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान सांख्यिकीविद्, अर्थशास्त्री और योजनाकार प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाने का उद्देश्य
1. सांख्यिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना- शासन, नीति-निर्माण, आर्थिक योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में सांख्यिकीय आंकड़ों की भूमिका को रेखांकित करना।
2. महालनोबिस के योगदान का सम्मान- उन्होंने भारत में आधुनिक सांख्यिकी के विकास तथा योजनाबद्ध आर्थिक विकास की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. विश्वसनीय आंकड़ों के उपयोग को बढ़ावा देना -सही आंकड़े बेहतर निर्णय लेने, संसाधनों के उचित वितरण और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक होते हैं।
4. युवाओं को सांख्यिकी के प्रति प्रेरित करना - विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सांख्यिकी एवं डेटा विज्ञान के क्षेत्र में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करना।

पी. सी. महालनोबिस का योगदान

  • Indian Statistical Institute की स्थापना (1931)।
  • महालनोबिस दूरी (Mahalanobis Distance) नामक प्रसिद्ध सांख्यिकीय अवधारणा का विकास।
  • भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की अवधारणा को विकसित करने में योगदान।

कब से मनाया जा रहा है?

भारत सरकार ने वर्ष 2007 से 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य सांख्यिकी को जन-जन तक पहुंचाना और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को उजागर करना है।

संक्षेप में, राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस केवल एक महान वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि सही आंकड़े ही सही नीतियों और सुशासन की आधारशिला होते हैं।

कार्यक्रम में उप महानिदेशक श्री रोशन लाल साह, उप निदेशक श्री परिमल, सहायक निदेशक श्री राजीव कुमार झा एवं श्री रश्मि रंजन सहित अनेक अधिकारियों ने भाग लिया।
उपस्थित वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारियों में श्री सुधीर कुमार झा, श्री देवेंद्र कुमार, श्री अमिताभ कुमार पाठक, श्री सुशील कुमार सिंह, श्री कमलेश प्रधान, श्री दिलीप कुमार, श्री कमलेश कुमार गुप्ता, श्री धीरेंद्र नाथ प्रसाद, श्री कुमार इन्द्रजीत, श्री जितेन्द्र राय, श्री सुवोध कुमार, श्रीमती प्रियंका कुमारी, श्रीमती मंजुषा कुमारी, श्री सुमित कुमार, श्री चन्दन कुमार, श्री मनीष कुमार एवं श्रीमती चंदा कुमारी शामिल थी ।

कनिष्ठ सांख्यिकी अधिकारियों में श्री गुरुराज सिंह, श्री केशव कुमार, श्री चन्दन कुमार, सुश्री विनीता कुमारी, श्री सौरभ कुमार वर्मा, सुश्री अंजलि वंदना एवं सुश्री सोनी कुमारी उपस्थित रहीं।
इसके अतिरिक्त श्री उपेश प्रसाद (स्टेनो ग्रेड-1), श्री राजीव परिहस्त (कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी), श्री मनोज कुमार (सहायक), श्री रामेंद्र कुमार एवं श्री आलोक कुमार पाण्डेय (उच्च वर्गीय लिपिक), श्री दिलीप कुमार नंदन, श्रीमती संस्कृति भारती, श्री रोकेश कुमार एवं श्रीमती नीतू कुमारी (निम्न वर्गीय लिपिक), श्री श्याम बाबु रजक, श्री अमित कुमार एवं श्री रवि कुमार (एमटीएस), सुश्री रूबी कुमारी, श्रीमती रेशु कुमारी, श्री आजाद कुमार एवं श्री रोकेश कुमार (प्रशासनिक सहायक कर्मचारी), श्री प्रवीण कुमार, श्री रोशन कुमार एवं श्री प्रशांत कुमार (सर्वेक्षण पर्यवेक्षक) ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सुश्री प्रिया कुमारी, श्री विवेक कुमार ठाकुर, सुश्री तन्वी ऐश्वर्यम तथा साहब अली भी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि सांख्यिकी किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला है तथा सटीक आंकड़ों के बिना प्रभावी नीति निर्माण संभव नहीं है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सांख्यिकीय कार्यों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं जनोपयोगी बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती प्रियंका कुमारी ने किया।
रिपोर्ट : विशेष संवाददाता

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