विश्वास
दो कदम साथ चल न सकेक्या दोगे जिंदगी में साथ।
जबकि बात-बात में खाते हो
साथ रहने की कसमे तुम।
पर हकीकत से तो तुम
क्यों दूर भाग रहे हो।
हो न इरादा पक्का यदि
तो मत चुनो तुम मुझको।।
मिले सौगात अगर अच्छी
तो क्या तुम छोड़ दोगी।
फिर अपनी कही बातों पर
तुम पुन: विचार करोगे?
जमाना बहुत बदल गया है
इसलिए सबको सुख चाहिए।
आ जाये दुख जीवन में तो
क्या मुझे तुम भूल जाओगे।।
साथी सही वही है जो
समय पर काम आ जाये।
कदम से कदम मिलाकर यारों
हर परस्थिति में साथ निभायें।
सुख-दुख यश-वैभव तो देखो
हमारी किस्मत का खेल है।
जो सबके कर्मों के अनुसार
जीवन में आते जाते रहते है।।
समय को देखकर जो भी
अपना रुख बदलते है।
ऐसे अवसरवादी लोगो से
हम सब दूर जो रहते है।
क्योंकि ऐसे लोगो पर
विश्वास नही कर सकते है।
और इस तरह के लोग
हर समाज में पाये जाते है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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