मर्द कमावे घर पल जावे,
औरत कमावे रौब दिखावे।जान लगी जब घर तै बाहर,
घर में फिर जी न लग पावे।
कुछ तो मजबूरी की मारी,
कमाना उनकी घनी लचारी।
बच्चों को पालन की ख़ातिर,
दिन रात काम करे बिचारी।
कुछ टैम पास करण ख़ातिर ही,
घर से बाहर घूमण ख़ातिर ही,
करें नौकरी घर काम से बच जाँ,
वे रूपै कमावें फ़ैशन ख़ातिर ही।
किट्टी क्लब पार्टी का शौक़,
नये नये सूट साड़ी का शौक़।
सहेलियों में धाक की ख़ातिर,
होटल में जा खाने का शौक़।
पति रहे चाहे उरले गाँव
वो रह लेगी परले गाँव।
पैसों की आज़ादी होगी,
नया बसा लेगी वो गाँव।
सास ससुर न ननद ही चाहवे,
रहने को घर तन्हा ही चाहवे।
सुबह की चाय दे पति बना के,
आज्ञाकारी हो ऐसा वर चाहवे।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews