नौतपा
जय प्रकाश कुवंर
हिन्दू धर्म में सूर्य देव को सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता, प्रकाश और उर्जा के श्रोत तथा नवग्रहों का प्रधान माना जाता है। उन्हें संसार की आत्मा और आरोग्य का देवता भी माना जाता है।
पृथ्वी पर सूर्य और मौसम का संबंध अटूट है। जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है तो अपने अक्ष पर झुकाव के कारण कभी उत्तरी गोलार्ध तो कभी दक्षिणी गोलार्ध सूर्य के सामने आता है। इसी से गर्मी, सर्दी, वसंत और पतझड़ जैसी ऋतुएँ बदलती रहती हैं।
पृथ्वी के अपनी धुरी पर लगातार घूमने के कारण ही दिन और रात भी होते हैं। पृथ्वी का जो हिस्सा सूर्य के सामने आता है, वहाँ सूर्य की रोशनी से दिन होता है, जबकि पीछे के हिस्से में अंधेरा होने से वहाँ रात होती है। दिन के समय सूर्य के प्रकाश से पृथ्वी गर्म होती है, जिससे तापमान बढ़ता है और रात के समय सूर्य की अनुपस्थिति से तापमान गिर जाता है।
हमारे देश भारतवर्ष में मुख्य रूप से मार्च से लेकर जून तक का समय गर्मी का महीना माना जाता है। इसमें अप्रैल, मई और जून के महीनों में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है। मई महीने को साल का सबसे गर्म महीना माना जाता है । भारतीय पंचाग के अनुसार गर्मी में बैसाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने आते हैं।
नौतपा, यानि गर्मियों के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। आमतौर पर यह अवधि २५ मई से शुरू होकर २ जून तक चलती है । इस दौरान सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे भयंकर गर्मी और लू चलती है।
ऐसा माना जा रहा है कि साल २०२६ में भी नौतपा २५ मई से २ जून तक चलेगा। इस अवधि में भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान है और तापमान अपने चरम पर रहेगा।
नौतपा की अच्छाईयों के बारे में धार्मिक मान्यता यह है कि नौतपा की अवधि के नौ दिन जितना ज्यादा तपते हैं, मानसून में बारिश उतनी ही अच्छी होती है।
नौतपा में चूंकि तापमान अक्सर सामान्य से काफी उपर चला जाता है, अतः हमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। यथा संभव चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर जरूरी कामवश बाहर निकलना पड़े तो हमें अपना सिर और चेहरा अच्छे से ढक कर निकलना चाहिए। इस दरमियान खूब पानी, नींबू पानी और छाछ पिना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाये।
तो आइये, कल से शूरू होने वाले साल २०२६ के नौतपा का उपरोक्त स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को बरतते हुए स्वागत करते हैं, क्योंकि इसका होना भारत में मानसून के समय अच्छी बारिश के लिए नितांत आवश्यक है, जिससे कि किसान अच्छी खरीफ फसल का उत्पादन कर सकें और देश अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बना रहे।
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