Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

काला पानी का दीपक

काला पानी  का दीपक 

भूगूर की मिट्टी से जन्मा,
एक सूरज का तेज था।
हाथों में कलम - तलवार लिए,
वो वीर सावरकर वेश था ।।

लंदन का कानून पढ़ा पर,
मन में भारत का ध्यान था।
इंडिया हाउस में अलख जगाई,
"1857 स्वतंत्र समर" गान था ।

फिरंगी कांपे नाम से उसके,
जंजीरें में जकड़ दिया।
काला पानी की कोठारी में,
दो जन्मों का दंड दिया।।

तेल प्रेस कोल्हू में,
हाथों में पड़ गए छाले।
फिर भी कलम नहीं रुकी,
लिख डाले "हिंदुत्व" के पाले।।

जात - पात की बेड़ी तोड़ी,
अस्पृश्यता पर वार किया।
, सप्त - श्रृंखला " तोड़ने खातिर,
रत्नागिरि में प्रहार किया।।

सागर ने भी रास्ता पूछा,
जब छलांग उस वीर ने मारी।
कहते हैं लहरें भी बोली,
"धन्य है भारत की सवारी"।।

अन्न - जल त्याग प्राण तजे,
आत्मर्पण का प्रण लिया।
मातृभूमि की सेवा करके,
अमर वो नाम कर लिया।।

काला पानी का दीपक वो,
आज भी हमें जलाता है।
वीर सावरकर नाम सुनते ही,
हर हिंदुस्तानी सिर झुकाता है।।

कलमकार.. संजय कुमार श्रीवास्तव गहमरी आचार्य, लेखक कवि।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ