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मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है

हिंदी केवल भाषा नहीं,यह भावों की मधुर सरिता, संस्कृति की सुगंध और हृदय की अभिव्यक्ति है।शब्दों में अपनापन, उच्चारण में मधुरता और आत्मा में भारतीयता लिए —मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।

मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है

कुमार महेन्द्र
तन-सौष्ठव सा शब्द-विन्यास,
अक्षर मनोरम अंतःकरण।
स्वर-श्रृंगार मुखचंद्र प्रभा,
आचार-विचार व्याकरण।
व्यक्तित्व-दीप्त संज्ञा-दर्शन,
सर्वनाम जनमन की सुगंध है।
मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।।


परिधान-प्रभामय अलंकार,
उपसर्ग सदृश मृदुल मुस्कान।
कारक-संग कर्मों का आह्लाद,
शुद्ध चरित्र शुभ पहचान।
प्रश्नोत्तर कृतित्व-कांति,
हाव-भाव प्रत्यय बंध है।
मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।।


गद्य-पद्य संवाद-संचरण,
रसमय सरस अभिव्यक्ति।
अर्थ-भाव मंगल स्पंदन,
विरामचिह्नों में शक्ति-भक्ति।
मृदु-मधुर मंगल उच्चारण,
विलोम-पर्याय नव उमंग है।
मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।।


लिंग-वचन स्नेहिल आकर्षण,
शुद्ध सात्त्विक भाव-प्रवाह।
पत्र, कहानी, कविता, कला,
निबंधों में आनंद अथाह।
शब्दकोष सोलह गुण-संपन्न,
प्रेयसी-प्रणय सदृश छंद है।
मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।।


संस्कृति-सुरभित जन-जन वाणी,
भारत-भू की गौरव-भाषा।
माँ के मृदुल स्पर्श समान,
मन में भरती नव अभिलाषा।
देववाणी-सम्मिलित मधुधारा,
हर अक्षर पावन आनंद है।
मुझे अंग्रेज़ी से बढ़कर हिंदी पसंद है।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)

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