जमशेदपुर से देश-विदेश तक गूंजा वीर सावरकर जयंती का उत्साह

- भारतीय जन महासभा द्वारा विविध कार्यक्रमों के साथ मनाई गई वीर सावरकर की जयंती
जमशेदपुर।
महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं हिंदुत्व के प्रबल समर्थक वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती वृहस्पतिवार को देशभर में श्रद्धा, सम्मान एवं राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। इसी क्रम में भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार के मानगो, जमशेदपुर स्थित आवास पर वीर सावरकर जयंती बड़े ही हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ वीर सावरकर के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर राष्ट्रसेवा एवं राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान देशभक्ति गीतों, राष्ट्रवादी विचारों एवं सावरकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित चर्चाओं से वातावरण ओजस्वी बना रहा।
इस अवसर पर भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने वीर सावरकर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी राष्ट्र चिंतक, महान साहित्यकार और सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए सावरकर ने जो त्याग और संघर्ष किया, वह भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को वीर सावरकर के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उनका राष्ट्रवाद, आत्मबल, संगठन शक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वीर सावरकर ने भारतीय समाज को आत्मगौरव और राष्ट्र चेतना का मार्ग दिखाया। उन्होंने विदेशी दासता के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अनेक यातनाएँ झेलीं, किंतु कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। अंडमान की सेल्युलर जेल में बिताए गए उनके कठोर जीवन का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।
जयंती समारोह में धर्म चंद्र पोद्दार के अलावा निशा वाणी, मधु सिन्हा, डॉ. आर. एस. अग्रवाल, आरती श्रीवास्तव, सुमित राज कात्यायन, प्रकाश मेहता, संजीव सिंह, राजा घोष, अनिल चौधरी, संजीव, अरुप जी, रमेश जी, आजाद जी, अरविंद पंडित, सुमित जी, संतोष कुमार सिंह, कुंदन जी सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। सभी ने वीर सावरकर के राष्ट्र निर्माण संबंधी विचारों को वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम के दौरान वीर सावरकर के साहित्य, उनके क्रांतिकारी विचारों तथा सामाजिक समरसता के लिए किए गए कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि सावरकर ने समाज में व्याप्त छुआछूत और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध भी महत्वपूर्ण कार्य किए थे। वे एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे जो आत्मनिर्भर, संगठित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो।
इस अवसर पर देश-विदेश के अनेक स्थानों पर भी वीर सावरकर जयंती मनाए जाने की जानकारी दी गई। जिन प्रमुख लोगों ने विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सहभागिता की, उनमें गंगा दीन जांगिड़, देशराज जांगिड़, जगदीश जांगिड़, सुमेर सेठी, ओम प्रकाश अग्रवाल, अनीता यादव, मोती लाल शर्मा, ए. के. जिंदल, मिथिलेश गोपाल उपाध्याय, बिदेह नंदिनी चौधरी, सुनील खेतान, जसवंत मईडा, धर्म पाल सिंह टेलर, दीप शेखर सिंहल, पीयूष तुलस्यान, लक्ष्मी गुंसाईं, राज कुमार सिंह, नरेंद्र पुरोहित, कृष्णा कुमार साहा, विक्रम खेतावत एवं गोविंद रंजन के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वक्ताओं ने कहा कि वीर सावरकर की जयंती केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का अवसर है। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।अंत में उपस्थित लोगों ने वीर सावरकर के बताए मार्ग पर चलने तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं भारत माता के जयघोष के साथ हुआ।
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