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दिव्य चेतना, संस्कृति और राष्ट्रभाव का अनुपम संगम : ‘दिव्य रश्मि’ पत्रिका का 13वां वार्षिकोत्सव पटना में भव्यता के साथ संपन्न

दिव्य चेतना, संस्कृति और राष्ट्रभाव का अनुपम संगम : ‘दिव्य रश्मि’ पत्रिका का 13वां वार्षिकोत्सव पटना में भव्यता के साथ संपन्न

  • धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के संरक्षण का सतत अभियान बना ‘दिव्य रश्मि’
पटना।
राजधानी पटना के प्रतिष्ठित बी.आई.ए. सभागार में उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक गंभीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब धर्म, अध्यात्म, संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना को समर्पित ‘दिव्य रश्मि’ पत्रिका का 13वां वार्षिकोत्सव अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य, शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, पत्रकारिता, समाजसेवा एवं अध्यात्म जगत से जुड़े अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं भारत माता तथा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। सभागार में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच ‘दिव्य रश्मि’ की 12 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया, जिसमें भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना, सनातन परंपरा एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण आलेखों को स्थान दिया गया है।
“दिव्य रश्मि केवल पत्रिका नहीं, एक सांस्कृतिक आंदोलन” - डॉ. मदन दुबे

कार्यक्रम की अध्यक्षता रेलवे से सेवानिवृत्त निदेशक एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मदन दुबे ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जब समाज तेजी से भौतिकवाद और बाजारवाद की ओर बढ़ रहा है, तब ‘दिव्य रश्मि’ जैसी पत्रिका का निरंतर प्रकाशित होना किसी तपस्या से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पत्रिका केवल समाचार या लेख प्रकाशित नहीं करती, बल्कि समाज को दिशा देने का कार्य करती है।

उन्होंने कहा कि आज अधिकांश मीडिया संस्थान मनोरंजन और सनसनी के पीछे दौड़ रहे हैं, जबकि ‘दिव्य रश्मि’ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना को केंद्र में रखकर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही है। उन्होंने पत्रिका से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं एवं संपादकीय टीम को बधाई देते हुए इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।
“व्यावसायिक युग में 12 वर्षों की निर्बाध यात्रा ऐतिहासिक” - अभयानंद

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित बिहार के पूर्व डी.जी.पी. एवं प्रख्यात शिक्षाविद् श्री अभयानंद जी ने कहा कि आज के पूर्णतः व्यावसायिक दौर में किसी धर्म आधारित पत्रिका का लगातार 12 वर्षों तक निर्बाध रूप से प्रकाशित होना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ‘दिव्य रश्मि’ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उद्देश्य पवित्र हो और संकल्प दृढ़ हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा कार्य किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज वैचारिक भ्रम और सांस्कृतिक विघटन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में ‘दिव्य रश्मि’ जैसी पत्रिकाएँ भारतीय समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। उन्होंने इसे “विचार और संस्कार की सतत यात्रा” बताते हुए कहा कि यह पत्रिका नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
“दिव्यता और रश्मि का संगम ही श्रेष्ठता” - आचार्य डॉ. धर्मेन्द्र

प्रख्यात संत एवं आध्यात्मिक चिंतक आचार्य डॉ. धर्मेन्द्र ने कहा कि उन्हें देशभर में भ्रमण करने का अवसर मिलता है, लेकिन ‘दिव्य रश्मि’ जैसी पत्रिका कहीं देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस पत्रिका के नाम में ही उसकी आत्मा छिपी हुई है- “दिव्यता” और “रश्मि” का संगम। जब दिव्यता के साथ प्रकाश की किरण जुड़ जाती है, तब श्रेष्ठता स्वतः प्रकट हो जाती है।

उन्होंने कहा कि यह पत्रिका भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को समाज तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। उन्होंने पत्रिका की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा को जीवित रखेंगे।

“प्रत्येक अंक संग्रहणीय” - डॉ. अजित कुमार पाठक

वरिष्ठ विद्वान एवं चिंतक डॉ. अजित कुमार पाठक ने कहा कि ‘दिव्य रश्मि’ का प्रत्येक अंक संग्रहणीय होता है। इसमें प्रकाशित सामग्री केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि चिंतन और मनन के लिए होती है। उन्होंने कहा कि पत्रिका के लेख समाज, संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्र से जुड़े गंभीर विषयों पर सारगर्भित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
“बिना मसालेदार खबरों के निरंतर प्रकाशन आश्चर्यजनक” — रोशन लाल साहू

उप महानिदेशक एवं क्षेत्रीय प्रमुख (ए.एस.आई.एस.ई.) श्री रोशन लाल साहू ने कहा कि जब से वे ‘दिव्य रश्मि’ से जुड़े हैं, तब से प्रत्येक अंक को नियमित रूप से पढ़ते हैं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में बिना राजनीतिक विवादों और मसालेदार समाचारों के कोई पत्रिका इतने वर्षों तक निरंतर प्रकाशित हो रही है, यह अपने आप में अनुकरणीय उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि ‘दिव्य रश्मि’ सकारात्मक पत्रकारिता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।
“लीक से हटकर चिंतन प्रस्तुत करती है पत्रिका” - मार्कण्डेय शारदेय

वरिष्ठ साहित्यकार श्री मार्कण्डेय शारदेय ने पत्रिका के आलेखों को “लीक से हटकर” बताते हुए कहा कि ‘दिव्य रश्मि’ उन विषयों को प्रमुखता देती है, जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया अक्सर नजरअंदाज कर देता है। वहीं श्री कमलेश पुण्यार्क “गुरूजी” ने कहा कि यह पत्रिका भारतीय संस्कारों और मानवीय मूल्यों को संरक्षित एवं प्रसारित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
अनेक गणमान्य व्यक्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में डॉ. त्यागराजन एस.एम., श्री लौकिक पारख, डॉ. जूली बनर्जी, डॉ. विवेकानन्द मिश्र, श्री पंकज कुमार मिश्र, डॉ. अंकेश कुमार, श्री लव कुमार मिश्र, डॉ. संजय कुमार झा, श्री ह्रदय नारायण झा, श्री संजय कुमार मिश्र ‘अणु’, प्रोफेसर डॉ. सुधा सिन्हा, डॉ. रेणु मिश्रा, डॉ. प्रियंका सिन्हा, डॉ. मंजू पाण्डेय, श्री विजय जायसवाल, श्रीमती मीरा प्रकाश, डॉ. शीला शर्मा, डॉ. अनिता देवी, डॉ. मीना कुमारी परिहार ‘मान्या’, आदित्य राज, सुरेश चंद पांडेय उर्फ त्यागी, रमेश कुमार सुदामा, श्री केशव कुमार, श्री श्याम श्यामल, श्री संजय कुमार, श्री सत्येंद्र कुमार पाठक, डॉ. संगीता सागर, डॉ. संध्या त्रिपाठी, डॉ. उषा श्रीवास्तव, डॉ. त्रिलोक चंद फतेहपुरी, डॉ. नीता सहाय, श्रीमती गीता चौबे, श्रीमती बबली कुमारी, श्रीमती नीतू सिंह, श्री राकेश कुमार मिश्र, सुश्री अनंता कुमारी, श्रीमती बिभा कुमारी, श्री शिवानंद गिरि, श्री प्रभाकर चौबे, श्रीमती स्वर्णिका मिश्रा, श्री अमृतेश कुमार शर्मा, श्रीमती श्वेता आनन्द, श्रीमती सुनैना सिंह, श्रीमती पूजा कुमारी “ऋतुराज”, सुश्री प्रज्ञा सिंह, श्री नित्यानंद ओझा, श्री कृष्णकांत दुबे, श्रीमती अरुणिमा कुमारी, श्री दिलीप कुमार अग्रवाल एवं श्रीमती कृति सुमन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके अतिरिक्त माँ वैष्णो देवी सेवा समिति पटना, स्वामी सुमन गिरि (बोधगया मठ, खजवती), शम्भू गिरि (पडरिया, बोधगया), निरज वर्मा (परैया), डॉ. जितेन्द्र कुमार दुबे (उतरैन कोच), दिलीप कुमार तुरी (बेला), किरण पाठक (जहानाबाद), दीपक पाठक (मानपुर), रणजीत राज, शीतला कुमारी, पुष्पलता चौबे, कुंदन मिश्रा, विश्वजीत चक्रवर्ती, पींकी गुप्ता, चन्द्रभूषण मिश्रा, सुनीता देवी, राजीवनयन पाण्डेय, प्रो. सुनील मिश्रा, फूल कुमारी यादव, शोभा कुमारी, हरिद्वार मिश्रा, प्रीति कुमारी, रणजीत मिश्रा एवं सोनी कुमारी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
अतिथियों का हुआ सम्मान

समारोह के दौरान समाज, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म एवं राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने पूरे आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। मंच से सभी सम्मानित अतिथियों के योगदान की सराहना की गई तथा उनके सामाजिक कार्यों को प्रेरणादायी बताया गया।
सांस्कृतिक चेतना और सकारात्मक पत्रकारिता का अनूठा उदाहरण

पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक गरिमा और राष्ट्रभाव की अद्भुत अनुभूति होती रही। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ‘दिव्य रश्मि’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और सामाजिक चेतना का एक सशक्त अभियान है।अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं राष्ट्र चेतना के प्रसार के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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