यह मत करना वह मत करना, ऐसे रोना वैसे हँसना,
बदल दिये रहने का रंग ढंग, ऐसे सजना कैसे जँचना।बरसों से हमें बदल रही, अब कहती हैं बदल गये हो?
अब पहले जैसे ज़रा नहीं हो, भूल गये तारीफें करना।
पहले खुद की खातिर जीते, अब उनकी खातिर जीना,
भूल गये अपना जीवन, याद रहा बस उनका सपना।
बदल बदल कर बदल गये, रहा नहीं कुछ पहले सा,
कहने को तो सब अपना, नहीं बचा कुछ भी अपना।
चाहे जितनी भी चिन्ताएँ, हमको दुख दर्द सताते हैं,
तन्हाई में रोते हैं पर, हम घर आकर मुस्कुराते हैं।
बदल दिया हमने सब कुछ, जैसा जैसा तुमने चाहा,
चाट पकौड़ी तुम्हें पसन्द है, हम भी हाँ कह जाते हैं।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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