मन की खुशी संस्कार पैदा करती है
डॉ अनीता देवीमन की खुशी जब मुस्काती है,
जीवन में नई बहार लाती है।
चेहरे पर खिलती मधुर हँसी,
हर दिल में प्रेम की ज्योति जगाती है।
खुश मन से ही अच्छे विचार,
बनते हैं जीवन के सच्चे संस्कार।
मीठे शब्दों की सरिता बहती,
कटुता की हर दीवार ढहती।
जहाँ हृदय में आनंद बसता है,
वहीं मानवता का दीप जलता है।
दया, करुणा और सम्मान का फूल,
बनाता जीवन को सुंदर और अनुकूल।
धन-दौलत से नहीं मिलता मान,
संस्कारों से बढ़ती है पहचान।
मन की खुशी जब भीतर खिलती है,
हर आत्मा से नेकी फिर मिलती है।
आओ ऐसा जीवन अपनाएँ,
खुशियों से हर आँगन सजाएँ।
मन की प्रसन्नता का यही सार,
खुशी ही जन्म देती है श्रेष्ठ संस्कार।
– डॉ. अनीता देवी 🌸 शिक्षिका जिला पूर्वी चंपारण बिहार
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