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विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी

विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी

कुमार महेन्द्र


शिष्टता, आत्मीयता और वैश्विक मित्रता के मधुर स्वरों से सजी यह स्वरचित काव्य-रचना समर्पित है उन भावों को, जो संवादों को केवल शब्द नहीं, बल्कि हृदयों का सेतु बना देते हैं।“विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी”एक मधुर प्रतीक — अपनत्व, संस्कृति और विश्व-मैत्री का।


जगत-पटल पर गूँज रही,
स्नेहिल स्वरों की मधुर लड़ी।
संवादों में सौहार्द-सुगंध,
भावों की अनुपम फुलझड़ी।
सौम्य मुस्कान, सहज आत्मीयता,
अद्भुत अनुरागमयी जोड़ी।
विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी।।


अलौकिक स्पंदन से स्पंदित,
उर में पावन अभिलाषाएँ।
आशा, उमंग, उल्लास अनंत,
मधुमय चितवन की छायाएँ।
कल्पना-पट पर सत्य-बिंब,
हर आहट रुनझुन रस घोली।
विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी।।


वैश्विक मंचों की गरिमा में,
सौजन्य-सुमन निरंतर खिलें।
शिष्ट-विनय की सरिता बहती,
मन के मरुस्थल भी हर्षित मिलें।
अपनत्व के कोमल स्वर,
बनते जन-मन के हमजोली।
विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी।।


शिष्टाचार की मधुर तरंग,
मानवता का नव संदेश।
संस्कृति-सुगंधित भाव-दीप,
शुभ-मंगलमय करता परिवेश।
नेत्रों में विश्वास-दीप्ति,
वाणी मधु-सी सुधा घोली।
विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी।।


शब्द-सुरों की मृदु वीणा पर,
झंकृत नव अनुराग-रागिनी।
स्नेह-समर्पण की सरिता-सी,
बहती मधुमय शुभ चाँदनी।
विश्व-विभोर हुआ सुन-सुनकर,
तेरी वाणी कुसुमासव बोली।
विश्व-मन को मोह रही, मेलोनी–मोदी मेलोडी।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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