फिर लौटूंगा
संजय जैनसबकी तो हम सुनते है।
पर मन की सुने नहीं।
दिलकी बातों पर भी हम।
क्यों करते यकीन नहीं।।
खेल-खेल में अपना हमने।
सब मैल निकाल दिये।
आनंद की अनभूति लेकर।
प्यार से गागर भर दिये।।
मेहनत से मंजिल मिलती गई।
दिल से जीत लिए दिलों को।
सोच समझकर खुदको देखो।
क्या मिला है कसम से तुमको।।
कौन हो तुम और हो कहाँ से।
मुझको तो कुछ पता नही।
बस बातों बातों में तुमने।
दिल में जगह बनी ली।।
गीत कविता लिख जाती है।
जब जब याद करें तुमको।
मानो मेरा साया हो तुम।
या हो कोई अदृश्य शक्ति।।
हमने तुमसे जो भी मांगा।
वो सब कुछ तुमसे पाया।
मेरे जीवन की प्रेरणा बनकर।
तुमने मुझसे सब लिखावाया।।
ज्यादा की चाहात नही रखते।
कम से पर काम चले नही।
देने वालें इतना दे देना।
की हँसी खुशी से जी सकूँ।।
लौटकर फिर मैं आऊंगा।
प्यार तुम्ही से करूँगा मैं।
अपने जीवन की नैया को।
तेरे हाथ में सौपोंगा।
मैं लौटकर फिर आऊंगा।
तेरा साथ निभाऊँगा।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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