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जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार

“जनगणना केवल आँकड़ों का संग्रह नहीं,बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।” आइए, जागरूक नागरिक बनकर प्रगणकों का सम्मान करें और राष्ट्र-निर्माण के इस महायज्ञ में अपना सहयोग दें।

जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार

कुमार महेंद्र
नव-भारत के शुभ प्रांगण में,
स्वप्न सुनहरे लाया है।
जन-जन के जीवन का दर्पण,
घर-घर तक पहुँचाया है।
मृदु मुस्कानों के पुष्प खिलें,
महके स्नेहिल व्यवहार।
जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार।।


सत्य तथ्य देकर सहयोगी बन,
कर्तव्य-दीप जलाइए।
जनगणना के पावन यज्ञ में,
अपना अंश चढ़ाइए।
गोपनीयता पूर्ण सुरक्षित,
रखे शासन अटल आधार।
जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार।।


परिसर, भवन, मकान, परिवार—
राष्ट्र-विकास के मूलाधार।
मुखिया, सदस्य, दंपती विवरण,
जनजीवन के सजीव विचार।
पेयजल, विद्युत, शौचालय से,
स्वच्छ बने हर घर-द्वार।
जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार।।


मोबाइल, संचार और वाहन,
जीवन-गति के नव आयाम।
हर प्रविष्टि बोले उन्नति,
हर आँकड़ा भारत का नाम।
डिजिटल युग की नव आभा,
प्रगति-स्वप्न करे साकार।
जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार।।


जनगणना केवल गणना नहीं,
राष्ट्र-विकास का दृढ़ आधार।
नीति, योजना और उन्नति का,
यही रचता नव विस्तार।
सजग नागरिक बन हम सब,
गढ़ें स्वर्णिम भविष्य-संसार।
जब प्रगणक आए द्वार, करें खूब आदर-सत्कार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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