28 मई : विश्व मासिक धर्म दिवस
शांति सोनी
नारी सम्मान, स्वास्थ्य जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना का अभियान
“नारी जीवन की सरिता में प्रकृति का यह पावन प्रवाह,
सृजन-शक्ति का दिव्य प्रतीक, जीवन का अनुपम निर्वाह।
जिससे चलती सृष्टि निरंतर, जिससे जग में नव निर्माण,
उसे समझना, उसे सम्मानित करना ही मानव का सच्चा ज्ञान।”
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” —वेदों की वाणी में गूँजे नारी गौरव का प्रकाश।ममता की मधुरिम गंगा, त्याग तपस्या की पहचान,उसके चरणों से महके घर-आँगन, संस्कृति और सम्मान।नारी ही नवजीवन की प्रथम प्रार्थना, प्रथम स्वरूप,उससे ही आलोकित होता मानवता का दिव्य रूप
प्रत्येक वर्ष 28 मई को “विश्व मासिक धर्म दिवस” मनाया जाता है। यह दिवस केवल स्वास्थ्य जागरूकता का अवसर नहीं, बल्कि नारी गरिमा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक संवेदनशीलता का वैश्विक अभियान है। मासिक धर्म प्रकृति द्वारा स्त्री को प्रदान की गई वह अद्भुत जैविक प्रक्रिया है, जो सृष्टि के सतत प्रवाह और मानव जीवन के अस्तित्व का आधार है। किंतु विडंबना यह है कि जिस प्रक्रिया से जीवन जन्म लेता है, उसी को समाज के अनेक हिस्सों में आज भी संकोच, अज्ञान और मिथकों के आवरण में ढँक दिया गया है।
मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि स्त्री शरीर की स्वाभाविक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। किशोरावस्था में प्रत्येक बालिका के जीवन में यह परिवर्तन उसके शारीरिक विकास और मातृत्व क्षमता का संकेत होता है। विज्ञान स्पष्ट रूप से बताता है कि यह प्रक्रिया हार्मोनल परिवर्तन के कारण होती है और स्त्री स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण भाग है। फिर भी आज भी अनेक स्थानों पर मासिक धर्म को लेकर भ्रांतियाँ फैली हुई हैं। कहीं इसे अपवित्र माना जाता है, तो कहीं इस विषय पर खुलकर बात करना अनुचित समझा जाता है। यही मौन कई बार किशोरियों के स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है।
विश्व मासिक धर्म दिवस का उद्देश्य इसी अज्ञान के अंधकार को दूर कर जागरूकता का दीप प्रज्वलित करना है। यह दिवस समाज को संदेश देता है कि मासिक धर्म पर खुलकर, सहजता और सम्मान के साथ चर्चा होनी चाहिए। जब तक इस विषय को सामान्य स्वास्थ्य शिक्षा का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा, तब तक महिलाओं को पूर्ण स्वास्थ्य अधिकार नहीं मिल पाएँगे।
आज भी ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में अनेक किशोरियाँ स्वच्छता संबंधी साधनों के अभाव में संक्रमण और बीमारियों का सामना करती हैं। स्वच्छ सेनेटरी उत्पादों की उपलब्धता, साफ पानी, उचित पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा अत्यंत आवश्यक हैं। विद्यालयों में किशोरियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। क्योंकि जब एक बालिका स्वस्थ होगी, तभी समाज और राष्ट्र भी स्वस्थ एवं प्रगतिशील बन सकेगा।
यह दिवस पुरुषों और समाज के अन्य वर्गों को भी संवेदनशील बनने की प्रेरणा देता है। मासिक धर्म केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की जिम्मेदारी है। परिवार और विद्यालय यदि सकारात्मक वातावरण प्रदान करें, तो किशोरियाँ बिना झिझक अपनी समस्याएँ साझा कर सकती हैं। आवश्यक है कि माता-पिता और शिक्षक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए बच्चों को सही जानकारी दें।
भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन और करुणा का प्रतीक माना गया है। इसलिए मासिक धर्म जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को शर्म या अपवित्रता से जोड़ना नारी सम्मान के विपरीत है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज अंधविश्वासों से ऊपर उठकर विज्ञान और संवेदना का हाथ थामे।
विश्व मासिक धर्म दिवस हमें यह संदेश देता है कि नारी स्वास्थ्य पर मौन नहीं, संवाद होना चाहिए; संकोच नहीं, सम्मान होना चाहिए। जब समाज मासिक धर्म को सहजता से स्वीकार करेगा, तभी वास्तविक समानता और सशक्तिकरण संभव होगा।
अंततः यही कहा जा सकता है कि मासिक धर्म प्रकृति का अभिशाप नहीं, बल्कि सृष्टि के नवजीवन का पवित्र उपहार है। इसे समझना, सम्मान देना और इसके प्रति जागरूक होना ही एक सभ्य, संवेदनशील और वैज्ञानिक समाज की पहचान है।
नारी केवल देह नहीं, सृष्टि-सृजन का पावन मंत्र,उससे ही मुस्काता जग, उससे ही जीवित हर तंत्र।जहाँ नारी का मान रहे, वहाँ बसता शुभ संस्कार,उसकी वंदनवार से ही महके जीवन का हर द्वार।आओ मिलकर प्रण यह लें — नारी का हो सदा सम्मान,उसकी गरिमा से ही उज्ज्वल होगा भारत देश महान।
रचनाकार का नाम शांति सोनी जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
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