ज्येष्ठ मास महात्मय {पंद्रहवां अध्याय} 
आनन्द हठीला
स्कन्द जी बोले कि हे विप्र लोग ! कपिल मुनि ने राजा सगर तथा ऋषिगणों से पूछा कि आपलोग कौन हैं ? और कहाँ से आये है ! तथा मेरे समीप किसलिये स्थित है। वे लोग बोले कि भगवन्! यह परम धर्मात्मा राजा सगर शोक दुःख से व्याप्त होकर आपके सामने गिरा है। इस राजा सगर के दुःख का कारण सुनिये, हे भगवन् ! आप अखिल के ज्ञाता है ॥ १- २॥
हे विभो ! बलवान् साठ हजार पुत्रों मे युक्त होकर राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ आरम्भ किया और संग्राम मे डन्द्र को भी जीत लिया है ॥३॥
जब अश्वमेघ यज्ञ आरम्भ हुआ और साठ हजार पुत्रों के तथा अनेक सैनिकों के साथ यज्ञाश्व जगतीतल पर छोड़ा गया ।॥४॥
तत्र वह घोड़ा भ्रमण करता हुआ अकस्मात् अन्तर्हित हो गया, उस यज्ञाश्व के अन्तर्हित हो जाने पर उन वीरों ने बिलपयन्त त्रैलोक्य में खोज किया ॥ ५ ॥
और विवरपर्यन्त समस्त पृथिवीतल के भागों को देखा । तदनन्तर वे सब सगरपुत्र विवर से संलग्न भूगृह में गये ॥६॥
हे ऋपिश्रेष्ठ ! इसके आगे का समाचार हमलोग नही जानते हैं। उन सगरपुत्रों के अन्वेषण (खोज) करने के लिये हमलोग आपके समीप आये है ॥ ७ ॥
समाधी के द्वारा सत्र समाचार जानकर कपिल ऋपि बोले कि हे ऋषि लोग ! इस कर्म को गुप्त रूप से इन्द्र ने किया है ॥ ८ ॥
और मेरे समीप बॉधकर स्वयं अपने लोक को चला गया । राजा लोग तथा राजमन्त्री और यज्ञाश्व के रक्षक लोग ॥ ९ ॥
मुझको चोर समझ कर स्वयं बॉधकर पीटने लगे। तदनन्तर क्रोधाग्नि से वे सब सगरपुत्रादि जल गये। मैंने उनको जानकर भस्म नहीं किया ॥ १० ॥
ऋपिश्रेष्ठ कपिल ने इस प्रकार कहकर विलाप करते नराधिप (सगर) को स्वयं उठाकर अपने हाथो से सगर के सुखकमल को पोंछा ॥११॥
और मधुर वचन बोले कि हे राजश्रेष्ठ ! भय न करो, तुम अपने राज्य को जाओ, तुम्हारा शतक्रतु (सौ यज्ञ) पूर्ण हो गयो ॥ १२॥
मेरे अनुग्रह से तुमको अवश्य महेन्द्रपद मिलेगा। और इन्द्र ने जो दुष्टता की है उस दुष्टबुद्धि के कारण अहिल्या मे इन्द्र की कामुक बुद्धि होगी ॥ १३ ॥
तथा गौतम ऋपि से शाप मिलने पर भग (योनि) से चिह्नित होकर रहेगा। राजा सगर को वर तथा इन्द्र को शाप देकर ॥१४॥
पुनः राजा सगर से बोले कि हे राजन् ! तुमको निय पुत्र हो । तुम्हारे ज्येष्ठ पुत्र की सासत्या नाम की श्रेष्ठ स्त्री होगी ॥१५॥
उसमे शूर सत्यपराक्रमी पुत्र अवश्य होगा और वहः भगीरथ नाम से विख्यात, सूर्यकुल का भूषण होगा ॥१६॥
तथा शस्त्र अस्त्र विद्या में कुशल, नीतिमान्, सत्यवान् और पवित्र आचरण का होगा। वह समस्त पृथिवो को जीतकर दुष्कर तप को करेगा ॥ १७ ॥
और तप के प्रभाव से देवसरिता जाह्नवी (गङ्गा) को स्वर्ग लोक से पितरों के उद्धार के लिये ले आयेगा ॥ १८ ॥
उस गङ्गा के जलबिन्दु के स्पर्श से साठ हजार आपके पुत्र दिव्य देहधारी हो जायगे और तुम्हारे साथ विष्णु मन्दिर (वैकुण्ठ) लोक को जायंगे ॥१९॥
पृथिवी पर राजा भगीरथ से लाई जाने के कारण उस समय के बाद भागीरथी नाम से गङ्गा की प्रसिद्धि होगी ॥ २० ॥
महात्मा कपिल ऋषि के वचन को सुनकर ऋत्विजों के साथ कंपिलजी का पूजन तथा उनको नमस्कार कर राजा सगर अपने पुर (नगर) को गये ॥२१॥
तदनन्तर बडे कष्ट के साथ कुछ समय बीतने पर एक सुदिवस में सती सुभगा के पुत्र पैदा हुआ ॥२२॥
अनेक गुणों से युक्त दूसरे जयन्त (इन्द्रपुत्र) के समान उस पुत्र का वसिष्ठ ऋषि ने आकर जातकर्मादि सस्कार किया ॥ २३ ॥
जन्म के समय गोदान तथा अनेकों अन्य दान देकर अन्य जनों को वत्र धन आदि देकर प्रसन्न किया ॥ २४ ॥
बारहवें दिन उस बालक का भगीरथ नाम रखा । वह बालक शुक्लपक्ष के चन्द्रमा के समान प्रतिदिन बढने लगा ।। २५ ।।
उपनयन समय आने पर पौत्र का विधिवत् उपनयन संस्कार किया। वह राजपुत्र समस्त विद्याओं का, हाथी घोडा रथादि का ।। २६ ।।
तथा समस्त कलाओं का ज्ञाता हो गया, इस प्रकार सोलह (१६) वर्ष के पूर्व समस्त विषयों का पूर्ण ज्ञाता हो गया ॥ २७ ॥
उसको समस्त गुणो से पूर्ण, राज्यभार को सहन करने में समर्थ, महान् ओजस्वी जानकर तथा मन्त्रियों के साथ विचारकर उस सुजन्मा भगीरथ को राज्य दे दिया ।॥ २८ ॥
तदनन्तर पितामह (दादा) का राज्य पाकर राजा भगीरथ समस्त पृथिवी-मण्डल का पुत्रवत् पालन करने लगा ॥ २९ ॥
इसके बाद राजा सगर राज्यभार से निवृत्त होकर परम सुख के भागी हुए ॥ ३० ॥
इति श्री भविष्यपुराणे ज्येष्ठमासमाहात्म्ये सनाढ्यवंशोद्भवव्याकरणाचार्य 'विद्यारत्न' पं० माधवप्रसादन्यासेन कृतायां भाषाटीकायां पञ्चदशोऽध्यायः ।। १५ ।।
क्रमशः...
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे फेसबुक पेज से जुड़े
https://www.facebook.com/divyarashmimag
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें
https://www.youtube.com/divyarashminews
हमें ट्विटर पर फॉलो करे :-
https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews