नेपाल के रौतहट जिला मुख्यालय गौर में धर्म, अध्यात्म एवं राष्ट्र विषय पर भव्य संगोष्ठी संपन्न

नेपाल के मधेश प्रदेश स्थित गौर में धर्म, अध्यात्म एवं राष्ट्र विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन गौर नगर पालिका सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम पूज्यपाद प्रेमचंद्र झा के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी विजय किशोर झा ने की। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, शिक्षाविद एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैदिक सनातन संस्कृति, अध्यात्म एवं राष्ट्र चेतना के प्रति जनजागरण करना था। अपने ओजस्वी संबोधन में प्रेमचंद्र झा जी ने कहा कि विश्व में मूल रूप से एक ही धर्म है — सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म। उन्होंने कहा कि अन्य सभी मत, पंथ, विचारधाराएं अथवा मजहब अपने-अपने मार्ग हैं, किंतु सनातन धर्म मानवता के शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक ही हैं, जिन्हें विभिन्न लोग अलग-अलग रूपों में पूजते हैं — कोई साकार रूप में, कोई निराकार रूप में, कोई सगुण तो कोई निर्गुण स्वरूप में।
उन्होंने सनातन धर्म की व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें चार युग, चार धाम, चार वेद, चार वर्ण, चार आश्रम तथा चार कुंभ की परंपरा है। उन्होंने कहा कि जब वैदिक संस्कृति संकट में पड़ी और समाज अपने मूल स्वरूप से भटकने लगा, तब भगवान आदि शंकराचार्य को ईसा से लगभग 507 वर्ष पूर्व अवतरित होना पड़ा। उन्होंने चारों धामों का पुनर्स्थापन कर वैदिक सनातन धर्म का पुनर्जागरण किया तथा चार पीठों की स्थापना की। प्रेमचंद्र झा जी ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में संपूर्ण भारतवर्ष में धर्म ध्वजा फहराते हुए सनातन संस्कृति को नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज उसी महान परंपरा का निर्वहन करते हुए भारत एवं नेपाल में वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। उनके मार्गदर्शन में भव्य भारत एवं नेपाल के निर्माण की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत और नेपाल पुनः हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित होंगे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शंभू शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक परंपरा ही ज्ञान और विज्ञान की वास्तविक आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यदि समाज वैदिक मूल्यों को आत्मसात करे तो एक भव्य, संस्कारित एवं समृद्ध नेपाल का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में पूज्य सीताराम दास महाराज, समाजसेवी जगन्नाथ केसरी तथा नगर पालिका के कमिश्नर विष्णु प्रसाद पोरेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने धर्म, अध्यात्म एवं राष्ट्र निर्माण के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए समाज में नैतिकता एवं सांस्कृतिक जागरण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन गुरुकुल के प्राचार्य नवनीत झा ने किया। उन्होंने मंच संचालन के साथ-साथ कार्यक्रम की विषयवस्तु को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में नरेंद्र झा, पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद्र झा, पत्रकार शैलेश गुप्ता, प्रमोद ठाकुर, संजीव झा, प्रभा सिंह, मुनिंदर ठाकुर सहित अनेक समाजसेवियों एवं नागरिकों की सक्रिय भूमिका रही।
संगोष्ठी के अंत में राष्ट्र, धर्म एवं संस्कृति की रक्षा तथा वैदिक परंपरा के प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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