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‘संवाद अधूरा सा’ का साहित्यिक गरिमा के साथ लोकार्पण, कविताओं में संवेदना और जनसरोकारों की मुखर अभिव्यक्ति

‘संवाद अधूरा सा’ का साहित्यिक गरिमा के साथ लोकार्पण, कविताओं में संवेदना और जनसरोकारों की मुखर अभिव्यक्ति

मुजफ्फरपुर। साहित्य, संवेदना और संवाद की सशक्त अभिव्यक्ति के बीच प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. लोकनाथ मिश्र के नवीन काव्य-संग्रह ‘संवाद अधूरा सा’ का लोकार्पण समारोह मंजुल प्रिया के सुरम्य सभागार में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूनम सिन्हा ने की। समारोह में साहित्य, शिक्षा और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेंद्र मधुकर ने काव्य-संग्रह पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कविता मनुष्य की अंतःचेतना का स्वाभाविक उद्गार है। जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों, संघर्षों और मानसिक द्वंद्वों को कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि कविता मूलतः स्वयं से, समाज से और पाठकों से किया गया एक सतत संवाद है। “संवाद अधूरा सा” इसी संवाद परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पटना से पधारे हिंदी एवं भोजपुरी के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. सुनील कुमार पाठक ने संग्रह की कविताओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि डॉ. लोकनाथ मिश्र की रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की गहराई, जनपक्षधरता और सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनकी कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और मानवीय कल्याण की चेतना को भी स्वर प्रदान करती हैं।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ने कहा कि डॉ. लोकनाथ मिश्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान दक्षता के साथ अपनी अनुभूतियों और विचारों को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि “संवाद अधूरा सा” ऐसा काव्य-संग्रह है जो पाठकों को सोचने, आत्ममंथन करने और जीवन के विविध पक्षों पर सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है।

भोजपुरी साहित्य के विद्वान डॉ. ब्रजभूषण मिश्र ने काव्य-संग्रह की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ. लोकनाथ मिश्र की कविताओं में भाषा की सहजता और भावों की गहराई का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कवि से निरंतर लेखन करते रहने का आग्रह किया ताकि साहित्य प्रेमियों और पाठकों को भविष्य में भी उत्कृष्ट सृजन का आस्वाद प्राप्त होता रहे।

समारोह के दौरान डॉ. वंदना विजयलक्ष्मी ने काव्य-संग्रह से चयनित कविताओं का अत्यंत प्रभावशाली और सुमधुर पाठ किया। उनके काव्य-पाठ ने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया तथा कविताओं के भावलोक से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. अनीता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि साधारण जीवन की घटनाएँ और सामान्य अनुभव जब किसी संवेदनशील कवि के शब्दों में ढलते हैं तो वे असाधारण प्रभाव उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. लोकनाथ मिश्र की कविताएँ पाठकों के भीतर प्रतिसंवेदना उत्पन्न करने की क्षमता रखती हैं और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को गहन अर्थ प्रदान करती हैं।

समारोह के प्रारंभ में सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में साहित्य और समाज से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें सविता राज, डॉ. विनोद कुमार सिन्हा, हरिकिशोर प्रसाद सिंह, उत्तम कुमार तथा उमानाथ सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

अंत में प्रख्यात उपन्यासकार श्री देवेंद्र कुमार ने आत्मीय धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा समाज में रचनात्मक संवाद की संस्कृति को मजबूत बनाते हैं।समारोह का समापन साहित्य, संवेदना और रचनात्मक संवाद के वातावरण में हुआ। काव्य-संग्रह ‘संवाद अधूरा सा’ के लोकार्पण ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को न केवल नई काव्यात्मक अनुभूतियों से परिचित कराया, बल्कि यह विश्वास भी जगाया कि साहित्य आज भी समाज के विचार, संवेदना और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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