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विंध्य पर्वतमाला: भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धुरी

विंध्य पर्वतमाला: भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धुरी

सत्येन्द्र कुमार पाठक
प्प्रकृति की प्राचीन दीवार विंध्य पर्वतमाला केवल पत्थरों और चट्टानों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास, भूगोल और संस्कृति का वह आधार स्तंभ है, जिसने सदियों से आर्यावर्त और दक्षिणापथ के बीच एक सेतु और विभाजक दोनों की भूमिका निभाई है। लगभग 1200 किलोमीटर की लंबाई में फैली यह श्रृंखला उत्तर भारत के विशाल मैदानों को दक्षिण के दक्कन पठार से अलग करती है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से यह हिमालय से भी प्राचीन है, जो भारत के भू-गर्भिक इतिहास की गवाह है। विंध्य पर्वतमाला एक श्रृंखला है, जो पश्चिम में गुजरात के जोबट से प्रारंभ होकर पूर्व में बिहार के सासाराम तक विस्तृत है। मध्य प्रदेश (हृदय स्थल): श्रृंखला का सर्वाधिक विस्तार यहीं है। भोपाल, इंदौर, दमोह और सागर जैसे जिले इसी की गोद में बसे हैं। गुजरात और राजस्थान: इसके पश्चिमी छोर गुजरात के पूर्वी हिस्से और राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी जिलों (जैसे धौलपुर और करौली) को स्पर्श करते हैं। उत्तर प्रदेश (मिर्जापुर-सोनभद्र): यहाँ विंध्य का स्वरूप अत्यंत धार्मिक और ऐतिहासिक है।
बिहार और झारखंड: पूर्व में कैमूर की पहाड़ियों के रूप में यह बिहार के रोहतास और जहानाबाद तक फैली है। झारखंड का उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र भी इसके प्रभाव में आता है। पर्वत समूह और शिखर: ऊंचाइयों का विवरण - विंध्य पर्वतमाला कई उप-श्रृंखलाओं का समूह है। प्रत्येक समूह की अपनी विशिष्ट पहचान है: भांडेर पर्वत समूह: यह मध्य प्रदेश के मध्य भाग में स्थित है। कैमूर (Kaimur) हिल्स: यह विंध्य का सबसे महत्वपूर्ण पूर्वी विस्तार है। यह उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार के रोहतास तक जाता है। सद्भावना शिखर (Goodwill Peak): दमोह जिले में स्थित यह शिखर (752 मीटर) पूरी श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है। बिहार के ऐतिहासिक पर्वत: मगध क्षेत्र में स्थित बराबर पर्वत समूह, ब्रह्मयोनि, राजगृह, और मंदार पर्वत इसी तंत्र के अभिन्न अंग हैं, जो मौर्यकालीन इतिहास को संजोए हुए हैं।
'जल-विभाजक' (Water Divide) है। यह गंगा नदी तंत्र और नर्मदा नदी तंत्र के बीच एक दीवार की तरह खड़ी है। उत्तर वाहिनी नदियां: चंबल, बेतवा, केन, काली सिंध और सोन नदियां इसी पर्वतमाला की ढलानों से निकलकर उत्तर की ओर बहती हैं और अंततः यमुना या गंगा में मिल जाती हैं। नर्मदा का सानिध्य: इसके दक्षिण में नर्मदा नदी एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है, जो विंध्य और सतपुड़ा के बीच एक प्राकृतिक विभाजक का निर्माण करती है।
विंध्य श्रृंखला से सटे पठार भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं: मालवा का पठार: उपजाऊ काली मिट्टी वाला यह क्षेत्र विंध्य के उत्तर में स्थित है। रेवा-पन्ना का पठार: यह क्षेत्र अपनी हीरा खदानों और बलुआ पत्थर के भंडार के लिए विश्व प्रसिद्ध है। रोहतास और छोटानागपुर: पूर्वी छोर पर स्थित ये पठार खनिज संसाधनों से समृद्ध है । विंध्य की गुफाएं और पत्थर मानव सभ्यता के शुरुआती प्रमाण देते हैं: भीमबेटका (म.प्र.): यहाँ के शैलचित्र प्रागैतिहासिक काल के मानव जीवन की झांकी प्रस्तुत करते हैं। बराबर की गुफाएं (बिहार): मौर्य सम्राट अशोक और दशरथ द्वारा निर्मित ये गुफाएं वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण हैं। लाल पत्थर का साम्राज्य: भारत के गौरव—दिल्ली का लाल किला, आगरा का किला और सांची का महान स्तूप—इसी पर्वतमाला से प्राप्त लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से निर्मित ह
भारतीय जनमानस में विंध्य का स्थान अत्यंत पवित्र है: । शक्तिपीठ विंध्याचल: मां विंध्यवासिनी का धाम इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाता है। अगस्त्य ऋषि की कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अगस्त्य ऋषि ने विंध्य के अहंकार को शांत किया था, जो उत्तर और दक्षिण के बीच सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक है। रामायण काल: चित्रकूट की पहाड़ियां, जहाँ प्रभु श्री राम ने वनवास का समय बिताया, इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। मगध क्षेत्र की विरासत और विंध्य पर्वतमाला से जुड़ी मगध प्रमंडल में हड़िया हिल १४७२ फिट , माहेर हिल १६०६ फिट , गया स्थित राम शिला हिल ७१५ फिट , कटारी हिल ४५४ फिट ,ब्रह्मयोनि हिल ७९३ फिट प्रेतशिला हिल ८७३ फिट , जहानाबाद जिले का बराबर हिल १०२३ फिट , कौवाडोल हिल , महेर हिल १६०६ फिट , पहरा हिल १३९२ फिट , द्वापर हिल १९१७ फिट ,रानीडीह पहाड़ ८९७ फिट ,की ऊंचाई पर है । नवादा जिले में महावार हिल १८३२ फिट , धुर्वा हिल २२०२ फिट , मूरगाढ़ा हिल १३४९ फिट , सतघरवा पहाड़ ११४५ फिट ,बजरी पहाड़ १३५९ फिट ,लोहारवा पहाड़ १११४फिट , सोंगा पहाड़ १००० फिट , हरला पहाड़ १०८३ फिट ,थारी पहाड़ ११००फिट ,गड्ढा पहाड़ ९३८ फिट , चरकी पहाड़ १०१० फिट ,श्रृंगी ऋषि पहाड़ १८५० फि हैहै।ट , बिहार के संदर्भ में विंध्य का महत्व और भी बढ़ जाता है। गया और जहानाबाद , नवादा , औरंगाबाद , नालंदा , रोहतास , कैमूर बक्सर, भागलपुर , बाका जिले के आसपास की पहाड़ियां जैसे बराबर, ब्रह्मयोनि , उमंगा , पवई , कैमूर , मदार और राजगृह न केवल भौगोलिक रूप से विंध्य से जुड़ी हैं, बल्कि वे मगध के उत्कर्ष की साक्षी रही हैं। मौर्यकालीन स्थापत्य कला और बौद्ध धर्म का प्रसार इन्हीं पहाड़ियों की गोद में हुआ।आज विंध्य पर्वतमाला खनन, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रही है। नर्मदा को बचाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इस पर्वत श्रृंखला का संरक्षण अनिवार्य है। यह श्रृंखला केवल भारत की 'रीढ़ की हड्डी' नहीं है, बल्कि यह हमारे गौरवशाली अतीत और सुरक्षित भविष्य की कड़ी है।
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