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गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में बुद्ध पूर्णिमा पर अर्पित किए गए श्रद्धासुमन

गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में बुद्ध पूर्णिमा पर अर्पित किए गए श्रद्धासुमन

  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही सिद्धार्थ बुद्धत्व प्राप्त करके गौतम बुद्ध बने
गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर कॉलेज परिसर में अवस्थित गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष "बुद्धं शरणं गच्छामि। धम्मं शरणं गच्छामि। संघम शरणं गच्छामि" के पावन मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कॉलेज की जन संपर्क अधिकारी डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी महाविद्यालय परिवार ने अति सम्मान तथा आदर से ओतप्रोत होकर गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर नया चीवर चढ़ाया। पुष्प समर्पित करके माल्यार्पण किया। डॉ प्यारे माँझी, डॉ आशुतोष कुमार पांडेय, सुरेंद्र कुमार, नीरज कुमार, रौशन कुमार, कृष्णदेव विश्वकर्मा के साथ समस्त महाविद्यालय परिवार ने गौतम बुद्ध के प्रेम, करुणा तथा अहिंसा पर आधारित सिद्धांतों को याद किया। सभी ने भक्ति भाव के साथ खीर एवं मोदक का प्रसाद ग्रहण किया। प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि वर्ष 1953 में स्थापित गौतम बुद्ध महिला कॉलेज का नाम गौतम बुद्ध महिला कॉलेज होना ही अपने आप में अत्यंत गौरव का विषय है। महाविद्यालय के लोगो में अवस्थित श्री विष्णुपुराण से उद्धृत श्लोकांश "सा विद्या या विमुक्तये" भी हमें गौतम बुद्ध के सिद्धांतों का स्मरण दिलाता है। "सा विद्या या विमुक्तये" का अर्थ ही है कि "विद्या वही है, जो मुक्ति प्रदान करे।" वास्तव में विद्या वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, अशिक्षा, अंधविश्वास, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, मोह, रोग, शोक, दुख, पीड़ा, भेदभावपूर्ण प्रवृत्ति, एवं सभी तरह के नकारात्मक बंधनों से मुक्त करे। गौतम बुद्ध के ज्ञान एवं अनुभव आधारित मानवतावादी सिद्धांत भी मनुष्य को भवबंधनों से मुक्त होने का मार्ग दिखलाते हैं। सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा, एवं विश्वबंधुत्व का संदेश देते हैं।

डॉ रश्मि ने बुद्ध पूर्णिमा को गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के साथ, मगध की ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक धरती के लिए भी अति विशिष्ट अवसर बतलाया। कहा कि बुद्ध पूर्णिमा वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन गौतम बुद्ध के सभी अनुयायियों के लिए अत्यंत विशिष्ट है, क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें आत्मज्ञान तथा महापरिनिर्वाण, दोनों की प्राप्ति हुई थी। वर्षों की कठिन तपस्या के बाद बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बोधगया के महाबोधि मंदिर में स्थित विश्व प्रसिद्ध पीपल वृक्ष- "बोधिवृक्ष", के नीचे सिद्धार्थ को सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था, और वे बुद्धत्व को प्राप्त हुए थे। बुद्ध पूर्णिमा ही वह दिन था, जब सिद्धार्थ बुद्धत्व प्राप्त करके गौतम बुद्ध बने।

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