Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने बांधा समां

मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने बांधा समां

अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार, 10 मई 2026 को श्री गांधी पुस्तकालय के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक वरिष्ठ एवं युवा कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कवि गोष्ठी की अध्यक्षता भोजपुरी के वरिष्ठ कवि सतेन्द्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन कवि एवं पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह की मार्मिक रचना “बेटी है घर की शान...” से हुआ।

अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान सतेन्द्र कुमार सत्येन ने अपनी भोजपुरी रचना “देवकी जी रोवत बारी कंस के जेलवा, बचिहें कईसे मोर ललनवा...” प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं कवि ओम प्रकाश गुप्ता ने “कलम सच की जब चलने लगे तो, झूठ को छुपाना मुमकिन नहीं है...” रचना के माध्यम से सामाजिक यथार्थ को उजागर किया।

हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा ने अपनी हास्य रचना “नारी जन जननी बनती मां को करता हूँ प्रणाम...” से वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। संचालन कर रहे प्रमोद नारायण मिश्र ने “दिल रोता है मैं हंसता हूं, अकेला दुनिया में मैं रहता हूँ...” सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।

कार्यक्रम के संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने “जिसके चरण शरण स्वर्ग हो वो तो बस माँ होती है...” रचना प्रस्तुत की। कवि रामवृक्ष राम चकपुरी ने “दहाड़ने की शक्ति हो तो लिख दो, भूमिका कागज-ए-स्याही...” के माध्यम से साहित्य की शक्ति को अभिव्यक्त किया।

वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक ने “जब जब कष्ट है होता, मां की याद आती है” रचना सुनाई। मुक्तककार दीनबंधु आजाद का मुक्तक “बचपन साथ रखिएगा, जिंदगी की शाम में” श्रोताओं को खूब पसंद आया। कवि अरुण कुमार तुलसी ने “है जगत की रीत निराली, समरथ को सब देते ताली...” तथा कवि अशोक भारती ने “दिल में कलियां खिली अगर तो, फूलों को बता देंगे...” प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

कार्यक्रम में व्यवस्था सहयोगी अजय कुमार की ग़ज़ल एवं कवि परशुराम ब्याहुत की अंग्रेजी कविता ने भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर भरपूर तालियां बटोरीं।कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अंततः अध्यक्ष की अनुमति से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ