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“नारायण नाम की महिमा अपार है” - आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज

“नारायण नाम की महिमा अपार है” - आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज

धर्मावती नदी के पावन तट पर अवस्थित हथियार गांव में आयोजित यज्ञ के अंतर्गत श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर जुगप्रधान आचार्य, पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र एवं ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया।
आचार्य धर्मेन्द्र जी ने विदुर-मैत्रेय संवाद के माध्यम से माया और मायापति के स्वरूप का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि “जो वास्तव में नहीं है, लेकिन होने का आभास देता है, वही माया है।” उन्होंने बताया कि माया से मुक्ति का सरल उपाय मायापति भगवान नारायण के चरणों का आश्रय लेना है। जो जीव नारायण की शरण में चला जाता है, उसके लिए माया बाधा नहीं बल्कि साधना का साधन बन जाती है।
सृष्टि खंड की कथा में आचार्य जी ने बताया कि ब्रह्मा जी से मनु और शतरूपा की उत्पत्ति हुई, जिनसे सृष्टि का विस्तार हुआ। उनके पुत्र प्रियव्रत और उत्तानपाद तथा पुत्रियां देवहूति, आकुति और प्रसूति के विवाह एवं वंश विस्तार का विस्तृत वर्णन किया गया। देवहूति का विवाह कर्दम ऋषि से, आकुति का रुचि प्रजापति से तथा प्रसूति का दक्ष प्रजापति से हुआ।
कश्यप चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने गृहस्थ जीवन के नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संध्या काल में आहार, मैथुन, शयन और अध्ययन जैसे कार्यों से बचना चाहिए।
आगे कथा में सती और भगवान शिव की कथा, माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म, तथा गणेश और कार्तिकेय के जन्म का प्रसंग भी सुनाया गया। गणेश जी के विवाह और उनके पुत्र शुभ-लाभ का भी उल्लेख किया गया।
उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव जी के चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने कहा कि दृढ़ संकल्प से असंभव कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही प्रह्लाद चरित्र और गजेंद्र मोक्ष की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान नारायण ही समस्त जीवों के सच्चे माता-पिता हैं, जो कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करते।
अजामिल मोक्ष की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए आचार्य जी ने कहा कि “नारायण नाम के स्मरण मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।”
कथा श्रवण के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा में संगीत की संगत अजय बाबा (करताल), मनोज तिवारी (पैड), मुन्ना सिंह (नाल), महेंद्र जी (बैंजो) एवं प्रदीप दुबे (जोड़ी) द्वारा की जा रही है। व्यवस्था समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जलपान एवं भंडारे की समुचित व्यवस्था की गई है। यज्ञशाला में सोनभद्र से पधारे अजय मिश्र एवं वाराणसी से आए विप्रवृंद, आचार्य शिवजी बाबा के मार्गदर्शन में याज्ञनिक कार्यक्रम संपन्न करा रहे हैं।
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