बिहार में ट्रेजरी संकट पर मंथन: डिजिटल वित्तीय सुधार को लेकर वेबिनार आयोजित

राजधानी पटना के फ्रेजर रोड स्थित जगत ट्रेड सेंटर में इंडियन सीए एसोसिएशन के तत्वावधान में बिहार की वित्तीय स्थिति, ट्रेजरी प्रबंधन की खामियों और डिजिटल वित्तीय सुधार पर एक महत्वपूर्ण वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का नेतृत्व एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीए संजय कुमार झा ने किया, जिसमें राज्य के विभिन्न वर्गों—सरकारी कर्मचारी, पेंशनधारी, शिक्षाविद, वित्त विशेषज्ञ एवं सामाजिक संगठनों—की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार में उभर रहे कैश फ्लो संकट (लिक्विडिटी क्राइसिस) के वास्तविक कारणों की पहचान करना और उसके समाधान के लिए ठोस एवं नीति-आधारित सुझाव प्रस्तुत करना था।
🔶 “पैसे की कमी नहीं, प्रबंधन की कमजोरी है असली संकट” – सीए झा
वेबिनार को संबोधित करते हुए सीए संजय कुमार झा ने कहा कि बिहार का वर्तमान वित्तीय संकट संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि ट्रेजरी प्रबंधन की कमजोरियों, डिजिटल निगरानी की कमी और वित्तीय प्राथमिकताओं के असंतुलन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में रियल-टाइम कैश पोजीशन उपलब्ध नहीं है, विभागीय डेटा एकीकृत नहीं है और भुगतान प्राथमिकता स्पष्ट नहीं है। साथ ही, PMFS प्रणाली में तकनीकी सीमाएं भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
🔶 जनहित पर असर: वेतन, पेंशन और विकास कार्य प्रभावित
वेबिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि इन खामियों के कारण कर्मचारियों के वेतन में देरी, पेंशनधारियों को भुगतान में बाधा, ठेकेदारों और श्रमिकों पर आर्थिक दबाव तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावट जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसे एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बताया गया, जो राज्य की समग्र प्रगति को प्रभावित कर रही है।
🔶 डिजिटल समाधान की ओर बढ़ने की जरूरत
सीए झा ने समाधान के रूप में “नेक्स्ट-जनरेशन ट्रेजरी सिस्टम (NGTS)” लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम में रियल-टाइम वित्तीय डैशबोर्ड, एआई आधारित नकदी प्रवाह पूर्वानुमान, एकीकृत वित्तीय प्लेटफॉर्म (बजट, ट्रेजरी और बैंकिंग का समन्वय), स्मार्ट भुगतान प्राथमिकता प्रणाली, ब्लॉकचेन आधारित ऑडिट ट्रेल और सार्वजनिक पारदर्शिता पोर्टल जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन सुधारों के लागू होने से वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, भ्रष्टाचार में कमी आएगी और शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
🔶 सरकार से विशेष नीति बनाने की अपील
इंडियन सीए एसोसिएशन ने बिहार सरकार से अपील की कि ट्रेजरी सुधार के लिए एक विशेष नीति या कानून बनाया जाए, रियल-टाइम फाइनेंशियल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए और डिजिटल जवाबदेही को सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, वित्तीय निर्णय प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने पर जोर दिया गया।
🔶 जनभागीदारी पर जोर
सीए झा ने कहा कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस विषय पर संवाद बढ़ाने और सुधार की दिशा में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
🔶 “तकनीक + पारदर्शिता + जवाबदेही = सुशासन”
वेबिनार के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि यह आयोजन केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार को एक मजबूत और पारदर्शी वित्तीय प्रशासन मॉडल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीति, आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता के साथ बिहार आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी वित्तीय प्रबंधन मॉडल के रूप में उभर सकता है।
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